महिला दिवस पर विधिक जागरूकता कार्यक्रम, उत्कृष्ट कार्य करने वालों को मिला सम्मान ..

कहा कि यदि किसी महिला को समाज, कार्यस्थल या किसी अन्य क्षेत्र में किसी प्रकार की परेशानी होती है तो वह जिला विधिक सेवा प्राधिकार कार्यालय में आकर अपनी समस्या रख सकती है. उन्हें कानून से जुड़ी सभी सुविधाएं निशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी.







                                       


  • व्यवहार न्यायालय परिसर में जिला विधिक सेवा प्राधिकार का आयोजन
  • महिलाओं के अधिकार, यौन उत्पीड़न कानून और घरेलू हिंसा अधिनियम पर दी गई जानकारी

बक्सर टॉप न्यूज, बक्सर : अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रविवार को व्यवहार न्यायालय परिसर स्थित जिला विधिक सेवा प्राधिकार कार्यालय में विधिक जागरूकता कार्यक्रम सह सम्मान समारोह का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में महिलाओं को उनके अधिकारों, कानूनों और सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों की जानकारी दी गई तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश काजल झांब के द्वारा विधिक सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले अधिवक्ताओं, न्यायिक कर्मियों और विधि स्वयंसेवकों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया.

बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, पटना के निर्देश पर आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन सुबह 10:30 बजे राष्ट्रीय गीत और दीप प्रज्वलन के साथ किया गया. कार्यक्रम की शुरुआत में जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनुपमा सिंह ने उपस्थित सभी लोगों का स्वागत किया. इसके बाद जिला अधिवक्ता संघ के सचिव बिंदेश्वरी पांडेय ने अपने विचार रखते हुए कहा कि समाज में न्याय और जागरूकता के लिए विधिक सेवा प्राधिकार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है. कार्यक्रम का संचालन न्यायिक पदाधिकारी आंचल ने किया.

मौके पर अवर न्यायाधीश सह सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकार नेहा दयाल ने महिलाओं को विधिक सेवा से जुड़ी सुविधाओं की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि यदि किसी महिला को समाज, कार्यस्थल या किसी अन्य क्षेत्र में किसी प्रकार की परेशानी होती है तो वह जिला विधिक सेवा प्राधिकार कार्यालय में आकर अपनी समस्या रख सकती है. उन्हें कानून से जुड़ी सभी सुविधाएं निशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी.

कार्यक्रम के दौरान जिले में विधिक सेवा के उद्देश्यों को पूरा करने में उत्कृष्ट योगदान देने वाले अधिवक्ता, न्यायिक कर्मचारी और विधि स्वयंसेवकों को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश काजल झाम्ब द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया. उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस हर वर्ष 8 मार्च को मनाया जाता है. यह दिन महिलाओं के अधिकार, सम्मान और सशक्तिकरण के लिए समर्पित है. नारी केवल एक शब्द नहीं बल्कि संपूर्ण सृष्टि का आधार है. भारतीय संस्कृति में नारी को शक्ति, ममता और त्याग का प्रतीक माना गया है.

उन्होंने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2026 की थीम “गिव टू गेन” है, जिसका अर्थ है कि सहयोग और संसाधनों के योगदान से महिलाओं का सशक्तिकरण होगा और इससे पूरे समाज को लाभ मिलेगा.

कार्यक्रम के दौरान कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम को लेकर एक संवेदीकरण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया. साथ ही विधि स्वयंसेवकों द्वारा एक नाटक प्रस्तुत किया गया, जिसमें शत्रुघ्न सिन्हा, बृजेश कुमार, मनन कुमार सिंह, प्रमोद कुमार, रामजी यादव और दीपिका केसरी ने अभिनय किया. नाटक के माध्यम से महिलाओं को उनके अधिकारों और कानूनों के बारे में जागरूक किया गया.

इस अवसर पर विभिन्न न्यायिक पदाधिकारियों ने भी अलग-अलग कानूनों की जानकारी दी. अवर न्यायाधीश सुधांशु पांडे ने घरेलू हिंसा अधिनियम 2005, जिला एवं सत्र न्यायाधीश सोनेलाल रजक ने दहेज निषेध अधिनियम 1961, जिला एवं सत्र न्यायाधीश अमित कुमार शर्मा ने पोक्सो एक्ट 2012 तथा जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनुपमा कुमारी ने महिलाओं से संबंधित यौन उत्पीड़न कानून और बचाव के उपायों के बारे में जानकारी दी.

कार्यक्रम के अंत में कार्यालय कर्मी दीपेश कुमार, सुधीर कुमार, सुनील कुमार, मनोज कुमार रवानी, पैनल अधिवक्ता आरती राय, संजय कुमार चौबे, अविनाश कुमार श्रीवास्तव, विवेक कुमार गुप्ता, कविंद्र पाठक सहित कई लोग मौजूद रहे.











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