आर्थिक संकट से जूझ रहे कर्मियों का कहना है कि दिसंबर माह से ही वेतन का भुगतान नहीं हुआ है. वहीं इस मामले में सिविल सर्जन का कहना है कि वेतन भुगतान का निर्णय राज्य स्तर पर होता है, इसलिए उनके स्तर से कुछ भी करना संभव नहीं है.
- स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत लगभग 130 डाटा एंट्री ऑपरेटर्स को दिसंबर से नहीं मिला वेतन
- आर्थिक तंगी से जूझ रहे कर्मी, बच्चों की पढ़ाई और परीक्षा पर भी मंडराने लगा खतरा
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत लगभग 130 डाटा एंट्री ऑपरेटर्स को पिछले तीन माह से वेतन नहीं मिलने के कारण इस बार उनकी होली बेरंग रही. होली बीतने के बाद अब उन्हें यह चिंता भी सताने लगी है कि यदि जल्द वेतन नहीं मिला तो ईद की खुशियां भी फीकी रह जाएंगी. आर्थिक संकट से जूझ रहे कर्मियों का कहना है कि दिसंबर माह से ही वेतन का भुगतान नहीं हुआ है. वहीं इस मामले में सिविल सर्जन का कहना है कि वेतन भुगतान का निर्णय राज्य स्तर पर होता है, इसलिए उनके स्तर से कुछ भी करना संभव नहीं है.
सदर अस्पताल सहित जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात डाटा एंट्री ऑपरेटर्स स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इसके बावजूद तीन माह से वेतन नहीं मिलने से उनकी स्थिति बेहद दयनीय हो गई है. कर्मियों का कहना है कि दिसंबर से वेतन लंबित है और इंतजार करते-करते जनवरी और फरवरी भी बीत गया, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला. ऐसे में यह भी निश्चित नहीं है कि मार्च माह में उन्हें वेतन मिल पाएगा या नहीं.
बेरंग रही होली, बच्चों की पढ़ाई पर संकट
नाम नहीं छापने की शर्त पर एक डाटा एंट्री ऑपरेटर ने बताया कि वेतन के अभाव में इस बार होली का त्योहार भी फीका रहा. आर्थिक तंगी के कारण बच्चों की स्कूल फीस तक जमा नहीं हो सकी है. स्कूल प्रबंधन की ओर से चेतावनी दी जा रही है कि यदि जल्द फीस जमा नहीं की गई तो मार्च में होने वाली फाइनल परीक्षा में बच्चों को बैठने नहीं दिया जाएगा. इससे अभिभावकों की चिंता और बढ़ गई है.
17 हजार से अधिक वेतन तय, लेकिन हाथ में मिलते हैं केवल 14 हजार
डाटा एंट्री ऑपरेटर्स के अनुसार उनकी नियुक्ति उर्मिला इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के माध्यम से की गई है. नियुक्ति के समय उन्हें बताया गया था कि करीब 17 हजार रुपये से अधिक का मासिक वेतन मिलेगा. हालांकि वास्तविकता यह है कि उन्हें हाथ में केवल लगभग 14 हजार रुपये ही मिलते हैं.
सिविल सर्जन बोले – राज्य स्तर से होता है भुगतान
इस संबंध में सिविल सर्जन शिव कुमार प्रसाद चक्रवर्ती ने कहा कि जिला स्वास्थ्य समिति की ओर से केवल उपस्थिति भेजी जाती है. वेतन का भुगतान राज्य स्वास्थ्य समिति के स्तर से होता है. इसलिए इस मामले में जिला स्तर से कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता.
फिलहाल सभी डाटा एंट्री ऑपरेटर्स को उम्मीद है कि राज्य स्वास्थ्य समिति जल्द ही इस समस्या का समाधान करेगी और लंबित वेतन का भुगतान किया जाएगा, ताकि उनकी आर्थिक परेशानियां कुछ हद तक कम हो सकें.




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