मृत महिला के शव को अपने वाहन में रखवाया और खुद उसे लेकर पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे, जिससे पीड़ित परिवार को बड़ी राहत मिली. देर रात तकरीबन तीन बजे तक पोस्टमार्टम की प्रक्रिया चलती रही, लेकिन रंजन कुमार राय पूरी रात वहीं डटे रहे और स्वजनों का हौसला बढ़ाते रहे.
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| पोस्टमार्टम हाउस में मौजूद रंजन कुमार राय |
- शव वाहन में जगह नहीं होने पर अपने वाहन से पहुंचाया दूसरी महिला का शव पोस्टमार्टम हाउस
- समाज सेवा के लिए चर्चित रंजन राय पहले से चला रहे हैं निःशुल्क एंबुलेंस और शिक्षा सहायता अभियान
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : इटाढ़ी रोड पर शुक्रवार की शाम हुए सड़क हादसे के बाद एक मार्मिक स्थिति सामने आई, जब मृत महिलाओं के स्वजनों को शव को पोस्टमार्टम हाउस तक ले जाने में परेशानी का सामना करना पड़ा. मौके पर बुलाए गए शव वाहन में केवल एक शव रखने की ही जगह थी, जिससे परिजन असमंजस और दुख में पड़ गए. इसी बीच किसी ने समाजसेवी रंजन कुमार राय को इस स्थिति की जानकारी दी.
सूचना मिलते ही रंजन कुमार राय तुरंत मौके पर पहुंचे और देवदूत बनकर सामने आए. उन्होंने दूसरी मृत महिला के शव को अपने वाहन में रखवाया और खुद उसे लेकर पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे, जिससे पीड़ित परिवार को बड़ी राहत मिली. देर रात तकरीबन तीन बजे तक पोस्टमार्टम की प्रक्रिया चलती रही, लेकिन रंजन कुमार राय पूरी रात वहीं डटे रहे और स्वजनों का हौसला बढ़ाते रहे.
दरअसल, राजपुर थाना क्षेत्र के ग्राम पो डिहरी निवासी रंजन कुमार राय लंबे समय से समाज सेवा के कार्यों में सक्रिय हैं. 10 मार्च 2011 को उन्होंने सीआरपीएफ में नौकरी ज्वाइन की थी. उनके बड़े भाई राजीव कुमार राय ने भी उसी समय सीआरपीएफ में सेवा शुरू की और करीब आठ वर्षों तक श्रीनगर में तैनात रहे.
अक्टूबर 2022 में पिता के हृदयाघात से निधन के बाद रंजन कुमार राय ने सीआरपीएफ की नौकरी छोड़ दी. इसके बाद वे सड़क निर्माण कार्य से जुड़ गए और वर्तमान में भारतमाला प्रोजेक्ट में कार्य कर रहे हैं. खास बात यह है कि वे अपनी आय का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा समाज सेवा में खर्च करते हैं.
रंजन कुमार राय ने “बक्सर वॉरियर्स” नामक संगठन की स्थापना की है, जिसके माध्यम से वे लगातार सामाजिक कार्य कर रहे हैं. सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को समय पर एंबुलेंस नहीं मिलने की समस्या को देखते हुए उन्होंने करीब 60 लाख रुपये की टोयोटा हाईलेक्स वाहन खरीदकर उसे सर्वसुविधा संपन्न एंबुलेंस में बदल दिया. इस एंबुलेंस में एक साथ चार घायलों को ले जाने की सुविधा है. इसके अलावा वे रक्तदान, इलाज और जरूरतमंदों की आर्थिक मदद भी करते रहते हैं.
शिक्षा के क्षेत्र में भी उन्होंने पहल करते हुए “वॉरियर्स कैरियर अकादमी” की स्थापना की है. यहां बच्चों को विशेषज्ञ शिक्षकों के माध्यम से विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती है और यह पूरी व्यवस्था निःशुल्क है.
उनके इन्हीं सराहनीय कार्यों को देखते हुए 5 जनवरी को पटना में उन्हें बिहार गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया. रंजन कुमार राय अक्सर प्रसिद्ध शायर साबित रोहतासवी का यह शेर गुनगुनाते हैं—
“जो अपनी फिक्र में गुजरे वो जिंदगी क्या है,
किसी के काम ना आए वो आदमी क्या है?”
इटाढ़ी रोड की घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि रंजन कुमार राय केवल यह शेर नहीं गुनगुनाते, बल्कि अपनी जिंदगी से उसे सच भी कर दिखा रहे हैं.




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