कुमार नयन की यादों में सजी साहित्यिक संध्या, विचारों की विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प ..

कहा कि कुमार नयन का व्यक्तित्व आज भी साहित्य जगत को प्रेरित करता है. वे जमीन से जुड़े रचनाकार थे, जिन्होंने साहित्य को अपने जीवन की संरचना में ढाल लिया था. उनका संपूर्ण जीवन साहित्य के प्रति समर्पित रहा और उनके विचार सदैव जीवित रहेंगे.






                               




- पांचवीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा, साहित्य की भूमिका और चुनौतियों पर हुई गहन चर्चा 

- वक्ताओं ने कहा—कुमार नयन ने साहित्य को जीवन की संरचना में ढालकर रचा इतिहास

बक्सर टॉप न्यूज, बक्सर : राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित साहित्यकार व ग़ज़लकार कुमार नयन की पांचवीं पुण्यतिथि पर स्थानीय ज्योति प्रकाश मेमोरियल लाइब्रेरी में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में उनके साहित्यिक योगदान को याद करते हुए वक्ताओं ने उन्हें विचारों की अमिट धरोहर बताया. कार्यक्रम में वर्तमान परिप्रेक्ष्य में साहित्य की भूमिका, चुनौतियां और समाधान विषय पर गोष्ठी आयोजित कर उनके आदर्शों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया.

कार्यक्रम की अध्यक्षता मशहूर हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ महेंद्र प्रसाद ने की, जबकि संचालन राजेश कुमार शर्मा ने किया. मुख्य अतिथि के रूप में देशज के संपादक अरुण शीतांश, महाशिवरात्रि हॉस्पिटल के निदेशक डॉ आशुतोष कुमार सिंह, डॉ शशांक शेखर, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ सत्येंद्र कुमार ओझा और बक्सर पब्लिक स्कूल के निदेशक निर्मल सिंह सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे.

सभा की शुरुआत अरुण शीतांश द्वारा कुमार नयन पर केंद्रित पुस्तक के लोकार्पण से हुई. उन्होंने कहा कि कुमार नयन का व्यक्तित्व आज भी साहित्य जगत को प्रेरित करता है. वे जमीन से जुड़े रचनाकार थे, जिन्होंने साहित्य को अपने जीवन की संरचना में ढाल लिया था. उनका संपूर्ण जीवन साहित्य के प्रति समर्पित रहा और उनके विचार सदैव जीवित रहेंगे.

प्रसिद्ध मंच उद्घोषक व ग़ज़लकार साबित रोहतस्वी ने अपने संस्मरण साझा कर सभा को भावुक कर दिया. उन्होंने कहा कि कुमार नयन की अनुपस्थिति साहित्य जगत में एक गहरा शून्य छोड़ गई है. वहीं, डॉ सत्येंद्र ओझा, निर्मल सिंह और डॉ आशुतोष सिंह ने कहा कि कुमार नयन केवल व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचार हैं, जिन्हें समाज के हर वर्ग तक पहुंचाना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी.

कार्यक्रम में फारूख सैफी ने ग़ज़लों के माध्यम से अपनी श्रद्धांजलि दी, जबकि नंदेश्वर पांडे ने उनकी रचनाओं को गीत के रूप में प्रस्तुत कर माहौल को जीवंत बना दिया. शिक्षक संतोष केसरी, रंजीत कुमार और कवि धनंजय ने भी अपनी रचनाओं व संस्मरणों के जरिए उन्हें याद किया. डॉ वैरागी प्रभाष ने साहित्य के समकालीन चुनौतियों पर विचार रखे.

अंत में बबन सिंह कुशवाहा, रामजी सिंह, बबलू राज, हैदर अली, दिनेश कुमार, रमेश राम, गुलाम ख्वाजा, रामाधार सिंह वैदेही, शंकर वर्मा, भरत प्रसाद, शमशाद अली, माइकल पांडेय, आशुतोष दुबे, अशोक कुमार, कन्हैया यादव, चंद्र किशोर कुमार, प्रशांत, रेखा कुमारी, कुमार अनुराग, सीमा कुमारी, क्षितिज कुमार, कुमार विज्ञान, कुमार तपस और कुमार फलक सहित अन्य लोगों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को गरिमामय बना दिया.














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