अनाथ बच्ची को मिला नया जीवन, कर्नाटक दंपति की गोद में खिली मुस्कान ..

ऐसे नवजात या छोटे बच्चे, जिन्हें लावारिस अवस्था में छोड़ दिया जाता है, उन्हें विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान में सुरक्षित रखकर उनका पालन-पोषण किया जाता है. वहीं, निःसंतान दंपतियों को एक वैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से इन बच्चों को अपनाने का अवसर मिलता है.






                               









समाहरणालय में भावुक पल, बच्ची को अपनाते ही छलक पड़े खुशी के आँसू
दत्तक ग्रहण प्रक्रिया से जुड़कर निःसंतान दंपतियों के लिए खुल रही नई उम्मीद
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : समाहरणालय परिसर में बुधवार को एक बेहद भावुक और सुखद क्षण देखने को मिला, जब साढ़े तीन वर्ष की एक अनाथ बच्ची को कर्नाटक के एक दंपति को सौंपा गया. इस पल ने न सिर्फ बच्ची को नया परिवार दिया, बल्कि एक दंपति की सूनी गोद भी भर दी. बच्ची को गोद में लेते ही दंपति की आँखों से खुशी के आँसू छलक पड़े और पूरा माहौल भावुक हो उठा.

जिला पदाधिकारी साहिला की उपस्थिति में आयोजित इस प्रक्रिया के दौरान बच्ची को विधिवत दत्तक ग्रहण के तहत सौंपा गया. बताया गया कि ऐसे नवजात या छोटे बच्चे, जिन्हें लावारिस अवस्था में छोड़ दिया जाता है, उन्हें विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान में सुरक्षित रखकर उनका पालन-पोषण किया जाता है. वहीं, निःसंतान दंपतियों को एक वैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से इन बच्चों को अपनाने का अवसर मिलता है.

दत्तक ग्रहण के लिए इच्छुक दंपतियों को भारत सरकार की CARA (Central Adoption Resource Authority) की आधिकारिक वेबसाइट www.cara.wcd.gov.in पर आवेदन करना होता है. आवेदन के साथ आधार कार्ड, वोटर कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट, जन्म प्रमाण पत्र जैसे जरूरी दस्तावेज जमा करने होते हैं. इसके बाद गृह अध्ययन रिपोर्ट, प्रतीक्षा सूची, मिलान प्रक्रिया और अन्य औपचारिकताओं को पूरा किया जाता है. दंपति का कम से कम दो वर्षों का स्थिर वैवाहिक संबंध, शारीरिक और मानसिक रूप से सक्षम होना तथा आर्थिक रूप से सुदृढ़ होना भी आवश्यक होता है.

इस अवसर पर उप विकास आयुक्त निहारिका छवि, सहायक समाहर्ता, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, जिला जन संपर्क पदाधिकारी, वरीय उप समाहर्ता सह प्रभारी सहायक निदेशक जिला बाल संरक्षण इकाई, सीपीओ, सामाजिक कार्यकर्ता परामर्शी एवं दत्तक ग्रहण संस्थान के प्रभारी समन्वयक मौजूद रहे.

यह दृश्य न केवल एक बच्ची के जीवन में खुशियों की नई शुरुआत का प्रतीक बना, बल्कि समाज के लिए भी यह संदेश छोड़ गया कि दत्तक ग्रहण एक महान और संवेदनशील पहल है, जो किसी के जीवन को पूरी तरह बदल सकती है.






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