अपने प्रवचन में भगवान राम के जीवन के विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख करते हुए लोगों को धर्म, मर्यादा और कर्तव्य का महत्व समझाया. उन्होंने कहा कि भगवान राम का जन्म राक्षसों के संहार के लिए हुआ था और उनके जीवन में मर्यादा का विशेष स्थान रहा है.
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| प्रवचन करते आचार्य |
- दंगौली गांव के राम जानकी मंदिर में 73वें वार्षिकोत्सव का दूसरा दिन आयोजित
- भगवान राम के जीवन प्रसंगों के माध्यम से दी जीवन मूल्यों की सीख
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : जिले के केसठ़ प्रखंड के दंगौली गांव स्थित राम जानकी मंदिर में चल रहे 73वें वार्षिकोत्सव के दूसरे दिन श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए आचार्य शैलेश जी महाराज ने कहा कि मनुष्य को मर्यादा पूर्वक अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए. उन्होंने भगवान राम के जीवन प्रसंगों के माध्यम से समाज को संस्कारित बनाने का संदेश दिया.
वार्षिकोत्सव के दूसरे दिन आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए, जहां शैलेश जी महाराज ने अपने प्रवचन में भगवान राम के जीवन के विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख करते हुए लोगों को धर्म, मर्यादा और कर्तव्य का महत्व समझाया. उन्होंने कहा कि भगवान राम का जन्म राक्षसों के संहार के लिए हुआ था और उनके जीवन में मर्यादा का विशेष स्थान रहा है.
उन्होंने रामचरितमानस का उल्लेख करते हुए बताया कि गोस्वामी तुलसीदास जी ने राम जन्म के पांच मूल आधारों की चर्चा की है, जो मानव जीवन को दिशा देने का कार्य करते हैं. उन्होंने कहा कि अच्छी संगति व्यक्ति के जीवन को ऊंचाइयों तक ले जाती है, जबकि बुरी संगति उसे पतन की ओर ले जाती है. इसलिए हर व्यक्ति को सदैव अच्छे लोगों के साथ रहना चाहिए.
शैलेश जी महाराज ने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में प्रत्येक कार्य नियमपूर्वक और मर्यादा के साथ करना चाहिए. ऐसा करने से न केवल व्यक्ति का जीवन बेहतर बनता है, बल्कि परिवार और समाज भी संस्कारित होता है. भगवान राम का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि मर्यादा की रक्षा के लिए उन्होंने वनवास स्वीकार किया, जो त्याग और कर्तव्य पालन का सर्वोच्च उदाहरण है.
उन्होंने विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को यह समझाने का प्रयास किया कि जीवन में अनुशासन और धर्म के मार्ग पर चलना ही सच्ची सफलता का आधार है.
कार्यक्रम के व्यवस्थापक राम किंकर सिंह उर्फ भिखारी सिंह के नेतृत्व में यह वार्षिकोत्सव तीन दिनों तक चल रहा है. उन्होंने बताया कि बुधवार 01 अप्रैल को वैदिक मंत्रोच्चारण, हवन-पूजन और भंडारा के साथ इस धार्मिक आयोजन का समापन किया जाएगा.






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