पुलिस ने आरोपी को हिरासत में रखा था, जबकि युवक का शव एक निजी अस्पताल में पाया गया. बाद में पोस्टमार्टम के दौरान यह स्पष्ट हो गया कि युवक की हत्या की गई है.
- बक्सर कोर्ट का सख्त फैसला, दोषी पर एक लाख रुपये का जुर्माना
- स्पीडी ट्रायल में दो साल बाद न्याय, 8 गवाहों के बयान पर टिका फैसला
बक्सर टॉप न्यूज, बक्सर : होली के दिन हुई सनसनीखेज हत्या के मामले में मंगलवार को बक्सर की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी शिक्षक द्वारिका पांडेय को उम्रकैद की सजा सुनाई है. जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय मनीष कुमार शुक्ला की अदालत ने दोषी पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. जुर्माना नहीं देने पर छह महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी. इस फैसले के साथ करीब दो साल से न्याय की आस लगाए पीड़ित परिवार को राहत मिली है.
अपर लोक अभियोजक विनोद कुमार सिंह ने बताया कि इस मामले की सुनवाई स्पीडी ट्रायल के तहत की गई. कोर्ट ने कुल 8 गवाहों के बयान और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को हत्या का दोषी पाया. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मामला “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” की श्रेणी में नहीं आता, इसलिए मृत्युदंड के बजाय उम्रकैद की सजा सुनाई गई.
बताते चलें कि घटना 26 मार्च 2024 की है, जब धनसोई निवासी महेश कुमार की हत्या कर दी गई थी. मृतक के भाई दीपक कुमार ने टाउन थाना में नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई थी. उन्होंने पुलिस को बताया था कि उनका भाई बक्सर आया था और शाम के समय डीएवी स्कूल के सामने के मकान में आरोपी द्वारिका पांडेय उसे अपने साथ ले गया था. इसके बाद वह घर नहीं लौटा.
देर रात पुलिस द्वारा सूचना दी गई कि युवक का एक्सीडेंट हो गया है, लेकिन जब परिजन पहुंचे तो मामला संदिग्ध लगा. पुलिस ने आरोपी को हिरासत में रखा था, जबकि युवक का शव एक निजी अस्पताल में पाया गया. बाद में पोस्टमार्टम के दौरान यह स्पष्ट हो गया कि युवक की हत्या की गई है.
कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी दिलाने के नाम पर लिए थे पैसे
जांच में यह बात सामने आई कि आरोपी ने कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी दिलाने के नाम पर मृतक से डेढ़ से दो लाख रुपये लिए थे. रुपये वापस नहीं करने की नीयत से ही पूरी साजिश रची गई और होली के दिन उसे बहाने से बुलाकर हत्या कर दी गई. इस मामले में द्वारिका पांडेय के साथ उनके भाई मिथिलेश कुमार पांडेय और दो महिलाओं को भी आरोपी बनाया गया था, लेकिन जांच में उनपर दोष सिद्ध नहीं हुआ.
करीब दो साल बाद आए इस फैसले ने एक तरफ जहां न्याय दिलाया, वहीं यह भी साबित कर दिया कि अपराध चाहे जितना भी योजनाबद्ध क्यों न हो, कानून के शिकंजे से बच पाना मुश्किल है.






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