झारखंड या धनबाद की कोयला खदानों से आने वाली मालगाड़ियों को बक्सर-पटना रूट पर आगे बढ़ने के लिए डीडीयू जंक्शन के मुख्य यार्ड में जाना पड़ता था. वहाँ व्यस्ततम यार्ड होने के कारण ट्रेनों को जगह मिलने में काफी समय लगता था.
- ट्रैक निर्माण पूरा होने के बाद ट्रायल रन शुरू, चौसा थर्मल पावर प्लांट के चालू होते ही नियमित रूप से दौड़ेंगी मालगाड़ियां
- डीडीयू जंक्शन जाए बिना सीधे पहुंचेगा कोयला, बक्सर-पटना रूट की यात्री ट्रेनों को लेटलतीफ़ी से मिलेगी बड़ी राहत
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : बिहार के औद्योगिक और बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है. पूर्व मध्य रेलवे (ECR) के पंडित दीनदयाल उपाध्याय (DDU) रेल मंडल द्वारा तैयार की गई एक महत्वाकांक्षी बाईपास रेल परियोजना बक्सर और विशेषकर चौसा के आर्थिक विकास के लिए सबसे बड़ी 'गेम-चेंजर' साबित होने वाली है. लगभग 2.66 किलोमीटर लंबी यह नई ब्रॉड गेज बाईपास लाइन न सिर्फ क्षेत्र में माल परिवहन की रफ्तार को दोगुना करेगी, बल्कि बक्सर और चौसा को पूर्वांचल व बिहार के सीमावर्ती इलाकों का एक बड़ा इंडस्ट्रियल हब बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी.
वर्तमान में इस महत्वपूर्ण लाइन का सिविल कंस्ट्रक्शन और ट्रैक बिछाने का मुख्य काम रेलवे द्वारा लगभग पूरा कर लिया गया है और यह परियोजना पूरी तरह से क्रियाशील होने के अपने अंतिम चरण (Final Stage) में प्रवेश कर चुकी है.
क्या है पूरा रेल रूट और कैसे बचेगा कीमती समय?
वर्तमान रेल व्यवस्था के तहत झारखंड या धनबाद की कोयला खदानों से आने वाली मालगाड़ियों को बक्सर-पटना रूट पर आगे बढ़ने के लिए डीडीयू जंक्शन के मुख्य यार्ड में जाना पड़ता था. वहाँ व्यस्ततम यार्ड होने के कारण ट्रेनों को जगह मिलने में काफी समय लगता था. इसके बाद सबसे बड़ी समस्या यह थी कि वहाँ ट्रेन के इंजन को रिवर्स (दिशा परिवर्तन) करना पड़ता था, जिसमें घंटों का बहुमूल्य समय नष्ट होता था और मुख्य जंक्शन पर भी ट्रैफिक का भारी दबाव बनता था.
इस बड़ी भौगोलिक और तकनीकी समस्या को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए रेलवे ने एक बेहद सटीक और छोटा रूट तैयार किया है. यह नई लाइन डीडीयू मंडल के गंजख्वाजा स्टेशन को सीधे कुछमन स्टेशन से जोड़ती है. अब कोयले की गाड़ियां डीडीयू स्टेशन के मुख्य यार्ड में प्रवेश ही नहीं करेंगी. वे गंजख्वाजा से इस नए 2.66 किलोमीटर के बाईपास ट्रैक को पकड़ेंगी और सीधे कुछमन स्टेशन होते हुए बक्सर-चौसा के मुख्य रूट पर आ जाएंगी.
नया रूट मैप इस प्रकार है:
कोयला खदानें (झारखंड/धनबाद) -> गया/सासाराम रूट -> गंजख्वाजा -> (नया बाईपास लाइन) -> कुछमन -> चौसा/बक्सर थर्मल प्लांट
जमीनी हकीकत : निर्माण पूरा, अब अंतिम परीक्षण का दौर
इस परियोजना की वर्तमान प्रगति की बात करें तो रेलवे ने इस रूट पर मिट्टी भराई, कंक्रीट के बड़े और छोटे पुलों का निर्माण तथा पटरियां बिछाने का मुख्य कार्य पूरी तरह संपन्न कर लिया है. अब यह परियोजना अपने सबसे महत्वपूर्ण दौर में है. रेलवे प्रशासन द्वारा इस नवनिर्मित रूट पर सुरक्षा और तकनीकी मानकों को जांचने के लिए ट्रायल रन और इंजन चलाकर टेस्टिंग की प्रक्रियाएं तेजी से पूरी की जा रही हैं.
चूंकि यह बाईपास लाइन मुख्य रूप से चौसा थर्मल पावर प्लांट को भारी मात्रा में कोयला पहुंचाने के उद्देश्य से बनाई गई है, इसलिए इसके पूरी तरह चालू होने के समय को चौसा प्लांट के अपने ट्रायल रन (बिजली उत्पादन की शुरुआत) और रेलवे साइडिंग के अंतिम तालमेल (Synchronization) के साथ जोड़ा गया है. जैसे ही चौसा पावर प्लांट की इकाइयां कमर्शियल लोड पर काम करना शुरू करेंगी, झारखंड की तरफ से आने वाली कोयले की मालगाड़ियां डीडीयू जंक्शन का चक्कर लगाए बिना, इसी नए बाईपास रूट से होकर नियमित रूप से गुजरने लगेंगी.
चौसा थर्मल पावर प्लांट के लिए 'लाइफलाइन' बनेगी यह बाईपास लाइन
बक्सर के चौसा में बन रहा एसजेवीएन (SJVN) थर्मल पावर प्लांट अब पूरी तरह सक्रिय होने के बेहद करीब है. इस विशाल बिजली घर को सुचारू रूप से चलाने और बिना किसी रुकावट के बिजली उत्पादन करने के लिए रोजाना हजारों टन कोयले की आवश्यकता होगी. इस विशाल जरूरत को पूरा करने के लिए रेलवे ने मुख्य बाईपास के साथ-साथ बक्सर-चौसा स्टेशन से सीधे पावर प्लांट परिसर के भीतर तक एक अत्याधुनिक रेलवे साइडिंग (विशेष ट्रैक) का निर्माण भी पूरा कर लिया है.
इस शॉर्टकट रास्ते से खदानों का कोयला बिना किसी देरी के सीधे पावर प्लांट के अंदर पहुंचेगा, जहाँ आधुनिक 'वैगन टिपलर' सिस्टम के जरिए पूरी मालगाड़ी से कोयला बेहद कम समय में ऑटोमैटिक तरीके से अनलोड कर लिया जाएगा. यह व्यवस्था सड़कों पर भारी ट्रकों के दबाव को कम करेगी, प्रदूषण से बचाएगी और बिजली घर को बिना किसी रुकावट के निर्बाध (uninterrupted) कोयला आपूर्ति सुनिश्चित करेगी, जिससे बिहार और आसपास के राज्यों को पर्याप्त बिजली मिल सकेगी.
आम रेल यात्रियों को भी मिलेगी लेटलतीफ़ी से बड़ी राहत
इस औद्योगिक बाईपास परियोजना का एक और बेहतरीन और सीधा फायदा बक्सर से सफर करने वाले आम रेल यात्रियों को भी मिलेगा. अक्सर देखा जाता था कि मालगाड़ियों को पास कराने या रास्ता देने के लिए बक्सर और पटना के बीच पैसेंजर, मेमू और कई महत्वपूर्ण सुपरफास्ट एक्सप्रेस ट्रेनों को आउटर पर घंटों खड़ा रहना पड़ता था, जिससे यात्री परेशान होते थे और ट्रेनें लेट हो जाती थीं.
मालगाड़ियों के इस नए बाईपास रूट पर शिफ्ट हो जाने से डीडीयू-बक्सर-पटना मेन लाइन पर यात्री ट्रेनों का ट्रैफिक लोड काफी कम हो जाएगा. इस बाईपास के पूरी तरह प्रभावी होने से मेन लाइन खाली रहेगी, जिससे बक्सर रूट पर चलने वाली पैसेंजर और एक्सप्रेस ट्रेनों की लेटलतीफ़ी से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी और ट्रेनों की समयबद्धता (punctuality) में अभूतपूर्व सुधार देखने को मिलेगा.
बक्सर के लिए वरदान होगी यह बाईपास रेल लाइन
रेलवे की यह छोटी लेकिन रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बाईपास लाइन बक्सर जिले के औद्योगिक और सामाजिक भविष्य को एक नई उड़ान देने वाली है. तेज, सुलभ और किफायती माल परिवहन के कारण आने वाले समय में बक्सर के आसपास नए उद्योगों, फैक्ट्रियों और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में निवेश के बड़े रास्ते खुलेंगे. इससे न केवल बक्सर का राजस्व बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे. बक्सर अब नए बिहार की औद्योगिक प्रगति की रीढ़ बनने के लिए पूरी तरह तैयार है.






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