वीडियो : CBSE 12वीं में जिला टॉपर अनुप्रिया बोलीं - शिक्षा ही दिलाती है समाज में बराबरी का अधिकार ..

उन्होंने सभी सफल छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि जिन विद्यार्थियों के अंक कम आए हैं, उन्हें निराश होने की जरूरत नहीं है. कम अंक असफलता नहीं होते, बल्कि आगे बेहतर करने की प्रेरणा देते हैं. 





                               


  • 97% अंक लाकर बक्सर का बढ़ाया मान, छात्राओं को दिया आगे बढ़ने का संदेश
  • फाउंडेशन स्कूल के प्राचार्य मनोज त्रिगुण बोले - बच्चों की तुलना नहीं, उनका उत्साह बढ़ाइए

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा में 97 प्रतिशत अंक प्राप्त कर बक्सर की अनुप्रिया ओझा ने जिला टॉपर बनकर जिले का नाम रोशन किया है. अनुप्रिया की इस उपलब्धि से परिवार, स्कूल और जिले में खुशी का माहौल है. सफलता के बाद अनुप्रिया ने अपनी मेहनत, संघर्ष, शिक्षकों के सहयोग और भविष्य की योजनाओं को लेकर खुलकर बातचीत की. वहीं उनकी मां सुमन ओझा और फाउंडेशन स्कूल, बक्सर के प्राचार्य मनोज त्रिगुण ने भी छात्रों और अभिभावकों के लिए कई महत्वपूर्ण बातें साझा कीं.

वीडियो में देखें अनुप्रिया का संदेश

अनुप्रिया ने कहा कि रिजल्ट आने के बाद वह काफी अच्छा महसूस कर रही हैं. उन्होंने सभी सफल छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि जिन विद्यार्थियों के अंक कम आए हैं, उन्हें निराश होने की जरूरत नहीं है. कम अंक असफलता नहीं होते, बल्कि आगे बेहतर करने की प्रेरणा देते हैं. उन्होंने कहा कि इंसान को कभी रुकना नहीं चाहिए, क्योंकि मेहनत कभी बेकार नहीं जाती.

डर को बनाया मोटिवेशन

परीक्षा के दौरान होने वाले तनाव पर अनुप्रिया ने कहा कि हर छात्र के मन में डर होता है, लेकिन वही डर आगे बढ़ने और बेहतर करने का मोटिवेशन भी देता है. उन्होंने कहा कि अगर छात्र सही दिशा में मेहनत करें तो कोई भी लक्ष्य मुश्किल नहीं होता.

छात्राओं को दिया खास संदेश

अनुप्रिया ने विशेष रूप से लड़कियों को पढ़ाई के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया. उन्होंने कहा कि अगर बेटियों को पढ़ने का अवसर मिला है तो उन्हें पूरी मेहनत और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए. शिक्षा ही समाज में बराबरी का अधिकार दिलाने का सबसे बड़ा माध्यम है.

स्कूल और शिक्षकों को दिया सफलता का श्रेय

अनुप्रिया ने बताया कि वह कक्षा पांचवीं से इसी स्कूल में पढ़ रही हैं. उन्होंने अपनी पढ़ाई, कम्युनिकेशन स्किल्स और लीडरशिप क्षमता का श्रेय स्कूल और शिक्षकों को दिया. उन्होंने कहा कि शिक्षकों ने न केवल पढ़ाई में मदद की, बल्कि परीक्षा के दौरान मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

दिल्ली विश्वविद्यालय से करना चाहती हैं पढ़ाई

भविष्य की योजनाओं पर बात करते हुए अनुप्रिया ने बताया कि अब वह दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन करना चाहती हैं. इसके बाद उनका लक्ष्य आरबीआई ग्रेड-बी परीक्षा पास कर देश की प्रतिष्ठित सेवाओं में योगदान देना है.

मां बोलीं - शिक्षकों के मार्गदर्शन से मिली सफलता

अनुप्रिया की माता सुमन ओझा ने कहा कि बेटी की सफलता पूरे परिवार के लिए गर्व का विषय है. उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 में बक्सर आने के बाद उन्होंने अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए फाउंडेशन स्कूल को चुना था. यहां के शिक्षक बच्चों को काफी अच्छा मार्गदर्शन देते हैं.

वीडियो में देखें अनुप्रिया की मां सुमन ओझा का संदेश : 


उन्होंने बताया कि उनकी बड़ी बेटी भी इसी स्कूल से पढ़ाई करने के बाद दिल्ली में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही है, जबकि छोटा बेटा अभी छठी कक्षा में पढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि बच्चों का नियमित स्कूल जाना और शिक्षकों के निर्देशों का पालन करना ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है.

शिक्षा जगत में सम्मानित नाम हैं मनोज त्रिगुण

फाउंडेशन स्कूल, बक्सर के प्राचार्य मनोज त्रिगुण जिले के शिक्षा क्षेत्र में एक सम्मानित और प्रतिष्ठित नाम हैं. उनके नेतृत्व में स्कूल ने न केवल बोर्ड परीक्षाओं में शानदार प्रदर्शन किया है, बल्कि जेईई मेन्स जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में भी छात्रों ने बड़ी सफलताएं हासिल की हैं.

परीक्षा परिणाम आने के बाद उन्होंने अनुप्रिया, उसके परिवार और सभी शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि 97 प्रतिशत या 98 प्रतिशत अंक हासिल करना कोई साधारण बात नहीं है. इसके पीछे छात्र की कड़ी मेहनत, शिक्षकों का सही मार्गदर्शन और अभिभावकों का सहयोग होता है.

बच्चों की तुलना न करने की अपील

मनोज त्रिगुण ने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि हर बच्चे की अपनी अलग क्षमता होती है. यदि कोई छात्र पहले 60 प्रतिशत अंक लाता था और इस बार 70 प्रतिशत प्राप्त करता है, तो यह भी उसके लिए बड़ी उपलब्धि है. अभिभावकों को दूसरे बच्चों से तुलना कर अपने बच्चों को हतोत्साहित नहीं करना चाहिए, बल्कि उनके प्रयासों की सराहना करनी चाहिए.

मोबाइल से दूरी और पढ़ाई का माहौल जरूरी

उन्होंने कहा that आज मोबाइल फोन बच्चों की पढ़ाई में सबसे बड़ी बाधा बनता जा रहा है. घर में ऐसा माहौल होना चाहिए जहां कुछ घंटे सभी लोग मोबाइल से दूरी बनाकर रखें और बच्चों से उनकी पढ़ाई, स्कूल और होमवर्क को लेकर बातचीत करें.

कोचिंग से ज्यादा जरूरी है सेल्फ स्टडी

प्राचार्य मनोज त्रिगुण ने कोचिंग संस्कृति पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि स्कूल में दी जाने वाली पढ़ाई पूरी तरह पर्याप्त है. यदि छात्र नियमित रूप से सेल्फ स्टडी करें और रोजाना 4 से 5 घंटे मन लगाकर पढ़ाई करें तो उन्हें अतिरिक्त कोचिंग की जरूरत नहीं पड़ेगी.

वीडियो में प्रिंसिपल मनोज त्रिगुण का संदेश : 

अनुप्रिया की सफलता बनी प्रेरणा

अनुप्रिया ओझा की उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि सही मार्गदर्शन, निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है. उनकी सफलता अब जिले के अन्य छात्रों, खासकर छात्राओं के लिए प्रेरणा बन गई है.














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