ऑक्सीजन बंद या आरोप? पार्वती मेमोरियल अस्पताल में महिला की मौत मामले में दोनों पक्षों ने दर्ज कराई FIR ..

उस वक्त नया मोड़ ले लिया जब नगर थाना पुलिस ने दोनों पक्षों की तहरीर पर क्रॉस FIR दर्ज कर ली. जहां एक तरफ पीड़ित परिवार अस्पताल पर 'पैसों के लिए ऑक्सीजन' बंद करने का रोंगटे खड़े करने वाला आरोप लगा रहा है, वहीं अस्पताल प्रबंधन इसे डॉक्टरों पर हमला बताकर पल्ला झाड़ रहा है.

घटना के दौरान अस्पताल परिसर में मची अफरातफरी 







                               

- परिजनों का आरोप - एक लाख रूपये जमा नहीं करने पर हटाया गया ऑक्सीजन सपोर्ट, इलाज में लापरवाही से गई जान  

- अस्पताल प्रबंधन का पलटवार - डॉक्टरों व स्टाफ के साथ मारपीट, तोड़फोड़ और धमकी देने का लगाया आरोप

बक्सर. नगर का चर्चित पार्वती मेमोरियल अस्पताल एक बार फिर विवादों के भंवर में है. बीती 12 मई को अस्पताल में एक महिला मरीज की मौत के बाद शुरू हुआ हाई-वोल्टेज ड्रामा अब पुलिस थाने पहुंच चुका है. मामले ने उस वक्त नया मोड़ ले लिया जब नगर थाना पुलिस ने दोनों पक्षों की तहरीर पर क्रॉस FIR दर्ज कर ली. जहां एक तरफ पीड़ित परिवार अस्पताल पर 'पैसों के लिए ऑक्सीजन' बंद करने का रोंगटे खड़े करने वाला आरोप लगा रहा है, वहीं अस्पताल प्रबंधन इसे डॉक्टरों पर हमला बताकर पल्ला झाड़ रहा है.


🚨 परिजनों का आरोप: '₹1 लाख नहीं दिए, तो तड़पते छोड़ दिया'

मृतका निर्मला देवी के बेटे अमित कुमार ने अस्पताल प्रबंधन पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं. शिकायत के मुताबिक:

  • ऑक्सीजन के बदले पैसे: 12 मई की शाम जब वो अपनी मां को गंभीर हालत में लेकर पहुंचे, तो अस्पताल में ऑक्सीजन सपोर्ट बंद था. चालू करने को कहा गया, तो कथित तौर पर ₹1 लाख की डिमांड की गई.

  • पैसे न देने पर मारपीट: आरोप है कि रकम न देने पर ऑक्सीजन चालू नहीं की गई. जब परिवार ने विरोध किया, तो अस्पताल प्रबंधक अनिल कुमार सिंह और उनके स्टाफ ने उन पर धारदार हथियारों से हमला कर दिया.

  • लूट और चोट: इस हिंसक झड़प में मृतका के भतीजे पुष्कर राज का सिर फट गया, राजेश कुमार की उंगली टूट गई और प्रफुल्ल राज के गले से सोने की चेन तक छीन ली गई. बाद में परिजन मरीज को दूसरे अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

"अगर अस्पताल समय पर ऑक्सीजन बंद न करता और इलाज देता, तो मेरी मां आज जिंदा होतीं."

अमित कुमार (मृतका के बेटे)


🏥 अस्पताल प्रशासन का पलटवार: 'मरीज गंभीर था, परिजनों ने की गुंडागर्दी'

दूसरी ओर, पार्वती मेमोरियल अस्पताल प्रबंधन ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे अस्पताल को बदनाम करने की साजिश बताया है.

  • प्रबंधक अनिल कुमार सिंह का दावा है कि मरीज की हालत पहले से ही बेहद नाजुक थी. डॉक्टर ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए किसी दूसरे बड़े अस्पताल ले जाने की सलाह (रेफर) दी थी.

  • अस्पताल का आरोप है कि यह सुनते ही परिजन भड़क गए और जबरन डॉक्टर के चेंबर में घुसकर स्टाफ के साथ मारपीट और तोड़फोड़ शुरू कर दी.


🔍 20 दिनों के भीतर दूसरा बड़ा कांड!

यह पहली बार नहीं है जब यह अस्पताल उंगलियों पर चढ़ा है. ठीक को दिन पहले यानी 27 अप्रैल को भी इस अस्पताल में प्रसव (डिलीवरी) के बाद एक महिला की तबीयत बिगड़ी थी. उसे भी रेफर किया गया और रास्ते में उसकी मौत हो गई थी. तब भी अस्पताल की महिला डॉक्टर पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगे थे. बार-बार होते ऐसे हादसों से अस्पताल की साख पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं.


🎥 अब 'तीसरी आंख' खोलेगी राज, पुलिस जांच में जुटी

नगर थानाध्यक्ष मनोज कुमार सिंह ने बताया कि दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. इस पूरे मामले में अब सबसे बड़ी और अहम कड़ी अस्पताल में लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरे हैं. पुलिस सीसीटीवी फुटेज को खंगाल रही है ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके.

बड़ा सवाल: क्या वाकई बक्सर के इस अस्पताल में चंद रुपयों के लिए एक मां की सांसें रोक दी गईं, या फिर डॉक्टरों के साथ कानून हाथ में लेने का खेल खेला गया? जांच के बाद जल्द ही इसका खुलासा होगा.














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