बक्सर-मोहनियां फोरलेन (NH-319A) के निर्माण में आई तेजी ..

इलाकों में पिलर गाड़ने और जमीन की मैपिंग पूरी होने के बाद अब वास्तविक निर्माण की राह लगभग साफ हो गई है. स्थानीय लोगों में इस प्रोजेक्ट को लेकर उत्साह का माहौल देखा जा रहा है.





                               


अहिरौली, जासो और पांडेयपट्टी में सीमांकन का काम पूरा

-  सड़क बन जाने के बाद अहिरौली के पास से सीधे 

बक्सर.
बक्सर और कैमूर जिले की लाइफलाइन माने जाने वाले राष्ट्रीय उच्च पथ NH-319A (मोहनियां-बक्सर मार्ग) के निर्माण कार्य ने अब तेज रफ्तार पकड़ ली है. लंबे समय से प्रतीक्षित इस परियोजना में जिला प्रशासन और निर्माण एजेंसी की सक्रियता बढ़ने के बाद काम धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है.

परियोजना की सबसे बड़ी प्रगति शहरी और ग्रामीण इलाकों के जुड़ाव को लेकर सामने आई है. ताजा जानकारी के अनुसार अहिरौली, जासो और पांडेयपट्टी क्षेत्रों में सड़क निर्माण के लिए सीमांकन (Demarcation) का कार्य लगभग पूरा कर लिया गया है.
इन इलाकों में पिलर गाड़ने और जमीन की मैपिंग पूरी होने के बाद अब वास्तविक निर्माण की राह लगभग साफ हो गई है. स्थानीय लोगों में इस प्रोजेक्ट को लेकर उत्साह का माहौल देखा जा रहा है.

66 किलोमीटर लंबे मार्ग से जुड़ेगा पूरा क्षेत्र

यह फोरलेन सड़क लगभग 66 किलोमीटर लंबी होगी, जो कैमूर के मोहनियां (NH-19) को बक्सर (NH-922) से जोड़ेगी.
बक्सर जिले में यह मार्ग चौसा, इटाढ़ी और राजपुर प्रखंडों के कई गांवों से होकर गुजरेगा. बनारपुर, सिकरौल, रहसीचक और बेनिया जैसे क्षेत्रों में भी भूमि अधिग्रहण और संबंधित प्रक्रियाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं.

बाइपास सड़क पर अखौरीपुर गोला पर फुट ओवरब्रिज तो कर्मनाशा के समीप बनेगा एक किलोमीटर लम्बा उपरगामी पुल:

बाइपास सड़क के निर्माण के दौरान छोटे बड़े मिलाकर कुल 22  छोटे-बड़े पुलों का निर्माण किया जाएगा. इनमें रेलवे ओवरब्रिज तथा नदियों के ऊपर बने पुल भी शामिल हैं.  विभागीय सूत्रों के मुताबिक अखौरीपुर गोला पर फुट ओवरब्रिज तो बनारपुर व सिकरौल स्थित कर्मनाशा के समीप एक किलोमीटर लंबा ओवरब्रिज बनाया जाएगा. इसके अतिरिक्त जो अन्य पुल बनाए जाने हैं उसमें बक्सर लड़ाई मैदान के पास ओवरब्रिज निर्माण के साथ-साथ नदांव हाल्ट एवं बक्सर रेलवे स्टेशन के बीच एक रेल ओवरब्रिज का निर्माण प्रस्तावित है. 

इसके अतिरिक्त सदर प्रखंड के बक्सर नहर, गुरुदास मठिया, छोटका नुआंव एवं दुबौली के बीच अलग-अलग तीन छोटे पुलों का निर्माण होगा. हरिपुर के पास ठोरा नदी पर भी पुल का निर्माण होगा. चौसा प्रखंड के शरीफपुर पवनी और चुन्नी के बीच दक्षिणी नहर पर भी छोटा पुल बनाया जाएगा. कनक नारायणपुर के पास फुट ओवरब्रिज का निर्माण होगा वहीं, अखौरीपुर के पास भी ओवरब्रिज का निर्माण होगा. बनारपुर के पास छोटा पुल तथा बनारपुर-सिकरौल स्थित कर्मनाशा के समीप  बड़े पुल का निर्माण होगा. इसके अतिरिक्त कैमूर के नुआंव के पास बड़ा पुल, कुशलपुर के पास बड़ा पुल तथा ओरियाडीह के पास बड़ा पुल बनाया जाएगा. वहीं, अनसी के पास एक छोटा पुल तथा कटरा, पानापुर, पतेलवा में अलग-अलग तीन बड़े पुल बनाए जाएंगे. चेचरिया के पास एक छोटा तथा घेघिया के पास छोटे पुल के साथ एक फुट ओवरब्रिज बनाया जाएगा.

लागत और निर्माण एजेंसी

इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण NHAI की देखरेख में किया जा रहा है.
केवल चौसा-बक्सर बाईपास खंड (पैकेज-2) पर ही लगभग ₹632.45 करोड़ की लागत निर्धारित की गई है. पूरी परियोजना की कुल अनुमानित लागत ₹1000 करोड़ से अधिक बताई जा रही है.
निर्माण कार्य EPC (Engineering Procurement Construction) मॉडल पर किया जा रहा है, जिससे गुणवत्ता और समय सीमा दोनों पर विशेष ध्यान रखा जा रहा है.

जाम से राहत और विकास को नई रफ्तार

इस फोरलेन के बनने के बाद बक्सर शहर को लंबे समय से चली आ रही जाम की समस्या से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. भारी वाहनों को शहर के अंदर प्रवेश करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, जिससे यातायात सुगम होगा.
साथ ही चौसा थर्मल पावर प्लांट की ओर जाने वाले वाहनों के लिए यह मार्ग एक महत्वपूर्ण और तेज रूट साबित होगा.

कब तक पूरा होगा निर्माण कार्य

परियोजना को पूरा करने के लिए 24 महीने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. वर्तमान में लगभग 80 प्रतिशत भूमि पर प्रारंभिक कार्य शुरू हो चुका है.
विभागीय सूत्रों के अनुसार यदि इसी गति से कार्य चलता रहा तो 2027 की शुरुआत तक इस फोरलेन पर वाहनों की आवाजाही शुरू होने की संभावना है.















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