जासो में छापेमारी के बाद पुलिस की सफाई, नहीं मिले देह व्यापार के साक्ष्य ..

पूछताछ और प्रारंभिक जांच के दौरान पुलिस को किसी प्रकार की आपत्तिजनक सामग्री, दस्तावेज या ऐसे साक्ष्य नहीं मिले, जिससे देह व्यापार या किसी अन्य अनैतिक गतिविधि की पुष्टि हो सके.






                               

जासो में छापेमारी के बाद पुलिस की सफाई, नहीं मिले देह व्यापार के साक्ष्य


- सूचना के आधार पर मकान में पहुंची थी पुलिस, पूछताछ के लिए लोगों को लाया गया था थाना

- पहले सेक्स रैकेट की सूचना पर हुई थी कार्रवाई, बाद में पुलिस ने जारी किया स्पष्टीकरण

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : जासो गांव में कथित देह व्यापार को लेकर दिनभर सोशल मीडिया और विभिन्न समाचार माध्यमों पर चल रही खबरों के बीच बक्सर पुलिस ने आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर पूरे मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है. पुलिस ने कहा है कि जांच और पूछताछ के दौरान देह व्यापार या किसी अन्य अनैतिक गतिविधि के संचालन की कोई पुष्टि नहीं हुई है.

पुलिस अधीक्षक कार्यालय से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, शुक्रवार को गुप्त सूचना मिली थी कि मुफस्सिल थाना क्षेत्र के जासो गांव स्थित एक मकान में कुछ पुरुष और महिलाएं एकत्रित हैं तथा उनके देह व्यापार में संलिप्त होने की आशंका है. सूचना मिलते ही मुफस्सिल थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित मकान में विधिवत छापेमारी की.

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने दो महिलाओं, तीन पुरुषों तथा मकान मालिक को सूचना के सत्यापन के लिए थाना लाकर पूछताछ की. पूछताछ और प्रारंभिक जांच के दौरान पुलिस को किसी प्रकार की आपत्तिजनक सामग्री, दस्तावेज या ऐसे साक्ष्य नहीं मिले, जिससे देह व्यापार या किसी अन्य अनैतिक गतिविधि की पुष्टि हो सके.

हालांकि, इससे पहले मुफस्सिल थानाध्यक्ष शंभू भगत ने प्रारंभिक जानकारी में बताया था कि सेक्स रैकेट संचालित किए जाने की सूचना के आधार पर छापेमारी की गई थी और हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ की जा रही थी. वहीं बाद में पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट किया गया कि जांच और पूछताछ के दौरान देह व्यापार या किसी अन्य अनैतिक गतिविधि के संचालन की पुष्टि नहीं हुई है.

बहरहाल, पुलिस की सफाई के बाद भी सवाल यह है कि पुलिस ने पकड़े गए लोगों को थाने में लाने के पूर्व यह क्यों नहीं स्पष्ट किया कि वह वहां किसी अनैतिक गतिविधि में शामिल थे अथवा नहीं? सवाल यह भी है कि यदि पकड़े गए लोग निर्दोष थे तो उनके के साथ इस तरह का व्यवहार क्यों किया गया?













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