भोजपुर एनकाउंटर पर गहराया विवाद, FIR की कहानी पर उठे सवाल; मां ने पुलिसकर्मियों पर लगाया गंभीर आरोप ..

मामला अब न्यायिक जांच के दायरे में है. इस बीच सुप्रीम कोर्ट और मानवाधिकार मंचों तक भी यह प्रकरण पहुंचने की चर्चा है. परिजनों और समर्थकों द्वारा न्याय की मांग लगातार उठाई जा रही है. अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं.





                              



- फेसबुक लाइव, बरामद खोखों और पुलिस के दावों को लेकर नई बहस
- मृतक भरत भूषण तिवारी की मां ने अधिकारियों को आवेदन देकर न्याय की मांग की

बक्सर टॉप न्यूज, बक्सर/आरा : भोजपुर के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो, पुलिस की ओर से दर्ज FIR और मृतक के परिजनों के आरोपों के बीच कई सवाल खड़े हो गए हैं. मामले को लेकर न्यायिक जांच के आदेश पहले ही दिए जा चुके हैं, जबकि मृतक की मां आशा देवी ने एनकाउंटर में शामिल पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.

FIR और घटनाक्रम को लेकर उठ रहे सवाल

वीडियो में दावा किया गया है कि भरत भूषण तिवारी ने पुलिस के सामने हथियार डाल दिया था और सरेंडर के लिए तैयार हो गया था. वहीं पुलिस की FIR में उल्लेख है कि उसने हथियार फेंकने के बाद दोबारा उसे उठाकर पुलिस पर फायरिंग की. इसी बिंदु को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं.

FSL रिपोर्ट की चर्चा से बढ़ा विवाद

वीडियो में यह भी दावा किया गया है कि पुलिस ने भरत द्वारा 10 से 12 राउंड फायरिंग किए जाने की बात कही, जबकि घटनास्थल से केवल दो खोखे बरामद होने की चर्चा की गई है. इसे लेकर सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं.

मां ने लगाया हत्या का आरोप

मृतक की मां आशा देवी ने पुलिस अधीक्षक को दिए आवेदन में आरोप लगाया है कि उनके बेटे ने आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद उसे गोली मारी गई. उन्होंने मामले में शामिल अधिकारियों और पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की मांग की है.

पुलिस का पक्ष भी सामने

पुलिस की ओर से दर्ज FIR में दावा किया गया है कि भरत भूषण तिवारी ने पुलिस टीम पर फायरिंग की थी, जिसके बाद आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की गई. पुलिस का कहना है कि कार्रवाई कानून के दायरे में की गई.

न्यायिक जांच पर टिकी निगाहें

मामला अब न्यायिक जांच के दायरे में है. इस बीच सुप्रीम कोर्ट और मानवाधिकार मंचों तक भी यह प्रकरण पहुंचने की चर्चा है. परिजनों और समर्थकों द्वारा न्याय की मांग लगातार उठाई जा रही है. अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं और जिम्मेदारी किसकी बनती है.












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