बीज वितरण मामले की जांच को तीन सदस्यीय टीम का हुआ गठन ..

माने तो बीज वितरण का कार्य इतना पारदर्शी होता है कि, उसमें गड़बड़ी की संभावना भी नहीं होती. दरअसल, सबसे पहले रजिस्टर्ड किसान अनुदान के लिए किस विभाग में आवेदन देते हैं जिसके बाद उनके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी भेजा जाता है जिसे लेकर किसान स्थानीय डीलर के पास पहुंचते हैं.

- कृषि समन्वयक द्वारा लगाए गए थे बीज वितरण में गड़बड़ी के आरोप
- चौसा के तात्कालिक कृषि समन्वयक ने वितरण में गड़बड़ी की कही थी बात

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर: चौसा प्रखंड के कृषि समन्वयक रामपुकार तिवारी के द्वारा बीज वितरण में धांधली की शिकायत मामले में जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन कर दिया गया है. जिला कृषि पदाधिकारी कृष्णानंद चक्रवर्ती के निर्देशानुसार तीन सदस्यीय जांच कमेटी में अनुमंडल कृषि पदाधिकारी कमलेश प्रसाद, सहायक निदेशक उद्यान दीपक कुमार तथा सहायक निदेशक पौधा संरक्षण गिरिराज कुमार शामिल हैं. इन्हें जल्द से जल्द मामले की निष्पक्ष जांच करते हुए रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है.

दरअसल, चौसा के कृषि समन्वयक रामपुकार तिवारी ने यह आरोप लगाया था कि, विभाग द्वारा बिना बीज वितरित किए ही अनुदान की राशि निकासी कर ली गयी है. ऐसे में उन्होंने जिला कृषि पदाधिकारी से इस संबंध में जानकारी देते हुए मामले की जांच कराने का अनुरोध किया था 

बेहद पारदर्शी है बीज के अनुदान वितरण का कार्य:

विभागीय सूत्रों की माने तो बीज वितरण का कार्य इतना पारदर्शी होता है कि, उसमें गड़बड़ी की संभावना भी नहीं होती. दरअसल, सबसे पहले रजिस्टर्ड किसान अनुदान के लिए किस विभाग में आवेदन देते हैं जिसके बाद उनके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी भेजा जाता है जिसे लेकर किसान स्थानीय डीलर के पास पहुंचते हैं जहां वह डीलर को ओटीपी बताते हैं. डीलर द्वारा अपने सिस्टम में ओटीपी फीड करने के साथ ही तुरंत विभाग को एक सूचना प्राप्त होती है जिसके बाद मौके पर ही रसीद भी जनरेट हो जाती है. जिसके बाद समन्वयक के सत्यापन के पश्चात विभाग द्वारा संबंधित किसान के खाते में अनुदान की राशि भेज दी जाती है.

कांग्रेस नेता ने समन्वयक के आरोप को बताया सही

कांग्रेस नेता टीएन चौबे बताते हैं कि, समन्वयक रामपुकार तिवारी के द्वारा लगाया गया आरोप बिल्कुल सही है. उन्होंने बताया कि, जिला कृषि कार्यालय भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है. कृषि पदाधिकारी अपनी मनमानी करते रहते हैं. उनकी घोटालों की फेहरिस्त इतनी लंबी है कि, अगर वह उजागर हो तो कई रिकॉर्ड बनेंगे.














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