शेर-ए-दिल के निधन पर शोक की लहर ..

शेर-ए-दिल राजनीति के साथ-साथ साहित्य तथा रंगमंच की दुनिया में भी खासे लोकप्रिय थे. उनके निधन की सूचना मिलते ही डुमरांव के आम व खास सबके बीच शोक की लहर व्याप्त हो गई. लोगों ने कहा कि अपनी तर्कपूर्ण बातों से वह विरोधियों को चित कर दिया करते थे. इतना ही नहीं जेपी सेनानी के रूप में मिलने वाली पेंशन वह समाज कल्याण के कार्यों में खर्च कर देते थे. 






- जेपी आंदोलन के प्रखर सेनानी थे शेर-ए-दिल
- अपनी पेंशन को समाज सेवा में कर देते थे खर्च

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : जयप्रकाश आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शुमार तथा वर्तमान में भाजपा नेता के रूप में कार्यरत वयोवृद्ध नेता रामजी सिंह यादव उर्फ शेर-ए-दिल का निधन हो गया है. उन्होंने रविवार को अपने निवास स्थान पर आखिरी सांस ली. वह कई वर्षों से बीमार चल रहे थे. बावजूद इसके सामाजिक रूप से उनकी सक्रियता कम नहीं हुई थी.


शेर-ए-दिल राजनीति के साथ-साथ साहित्य तथा रंगमंच की दुनिया में भी खासे लोकप्रिय थे. उनके निधन की सूचना मिलते ही डुमरांव के आम व खास सबके बीच शोक की लहर व्याप्त हो गई. लोगों ने कहा कि अपनी तर्कपूर्ण बातों से वह विरोधियों को चित कर दिया करते थे. इतना ही नहीं जेपी सेनानी के रूप में मिलने वाली पेंशन वह समाज कल्याण के कार्यों में खर्च कर देते थे. उनके निधन पर शोक व्यक्त करने वालों में सच्चिदानंद भगत, ओमप्रकाश भुवन, बलिराम पांडेय, विंध्यांचल राय, दिलीप श्रीवास्तव, मंतोष सिंह, प्रेम कुमार, पवन जायसवाल समेत तमाम लोग शामिल रहे.


















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