ठोरी पांंडेयपुर में श्री रुद्र महायज्ञ : प्रवाहित हो रही भक्तिरस की अविरल धारा ..

देवताओं का आह्वान करते हुए कहा कि यज्ञ से जगत कल्याण होता है. सभी चराचर जीव जीवांत होते हैं. यज्ञ सनातन धर्म की वैदिक परंपरा है. यज्ञ से संपूर्ण पर्यावरण शुद्ध होता है. जिसका मुख्य उद्देश्य सर्वे भवंति सुखिन: सर्वे संतु निरामया: की जगत कल्याणकारी भावना परिलक्षित होती है. 







- विद्वान पंडितों और संत माहात्माओं के सानिध्य में चल रहा है श्री रूद्र महायज्ञ    
- यज्ञ भगवान के जयघोष और वैदिक मंत्रोच्चारण से गुंजायमान हुआ पूरा इलाका             

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : चौगाईं प्रखंड क्षेत्र के ठोरी पांडेयपुर गांव में महान संत और वैष्णव मणि नारायणाचार्य जी महाराज के निर्देशन में चल रहे श्री रुद्र महायज्ञ को लेकर श्रद्धा और भक्ति का माहौल कायम है. यज्ञमंडप की परिक्रमा सहित अन्‍य धार्मिक अनुष्‍ठानों में भाग लेने के लिए उमड़ा जन सैलाब इस तथ्‍य की प्रमाणिकता को सिद्ध कर रहा था. इस दौरान पुरूषों की अपेक्षा पीले परिधानों में महिलाओं की सहभागिता काफी अधिक रही. यज्ञ मंडप की परिक्रमा के दौरान महिलाओं द्वारा गाए जा रहे मांगलिक गीतों से माहौल भक्तिमय रहा. यज्ञमंडप की परिक्रमा के लिए श्रद्धालु भक्तजनों में होड़ मची है. महायज्ञ स्‍थल पर श्रद्धा एवं विश्‍वास के साथ पूजा-अर्चना कर श्रद्धालु परमानंद की अनुभूति प्राप्त करते नजर आए. 




दूसरी ओर विद्वान वैदिक पंडितों द्वारा यज्ञाचार्य पं.उमाकांत ओझा के निर्देशन में मंत्रोच्‍चारण से वायुमंडल गुंजायमान हो रहा हैं. इस दौरान भगवान शंकर के जयघोष एवं हर-हर महादेव से पूरा क्षेत्र गुंजायमान होता रहा. महायज्ञ परिसर में चारों तरफ मेला का नजारा देखने को मिल रहा है. रविवार को भव्य शोभ जुलूस सह कलश यात्रा के साथ शुरू हुआ महायज्ञ छह दिसंबर तक चलेगा. इस दौरान नित्य भागवत पूजन, प्रवचन एवं भजन संध्या का कार्यक्रम चल रहा है. पांच दिसंबर को महायज्ञ की पूर्णाहुति और छह दिसंबर को ही बृहद भंडारे का भी आयोजन किया गया है. इसको लेकर महायज्ञ परिसर को आकर्षक तरीके से सजाया गया है.

यज्ञ मंडप की परिक्रमा से पूर्ण होती है श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं : नारायणाचार्य

भगवान का मुख अग्नि रूप है. विश्व के पालन हार भगवान विष्णु व संपूर्ण चराचर को जीवंत करने वाले 33 करोड़ देवी व देवताओं को प्रसन्न करने के लिए यज्ञशाला में स्थापित हवन कुंड में अरणि मंथन द्वारा अग्नि प्रकट किया गया. यज्ञाचार्य पं.उमाकांत ओझा, पं. उदयनारायण शास्त्री, पं. अशोक पांडेय, आचार्य श्रीनिवास मिश्रा और पं.पंकज शास्त्री ने वेद की ऋचाओं व मंत्रों के माध्यम से देवताओं का आह्वान करते हुए कहा कि यज्ञ से जगत कल्याण होता है. सभी चराचर जीव जीवांत होते हैं. यज्ञ सनातन धर्म की वैदिक परंपरा है. यज्ञ से संपूर्ण पर्यावरण शुद्ध होता है. जिसका मुख्य उद्देश्य सर्वे भवंति सुखिन: सर्वे संतु निरामया: की जगत कल्याणकारी भावना परिलक्षित होती है. महान संत और वैष्णोमणि नारायणाचार्य जी महाराज ने कहा कि यज्ञमंडप की परिक्रमा से श्रद्धालु भक्तजनों की सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती है.

श्री रूद्र महायज्ञ को लेकर हुआ संत समागम : 

ठोरी पांडेयपुर में श्री रूद्र महायज्ञ के आयोजन को लेकर संत समागम से भक्तिरस की अविरल धारा प्रवाहित हो रही है. यज्ञ आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि इस महायज्ञ को लेकर प्रेम नारायणाचार्य उर्फ पीतांबर जी और धनंजय शास्त्री जी सहित अन्य कई विद्वान प्रवचनकर्ताओं और संत महात्माओं का आगमन हुआ है.







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