पुरानी सफाई एजेंसी का कार्यकाल समाप्त होते ही नगर परिषद क्षेत्र की सफाई का जिम्मा एक नई एजेंसी को सौंप दिया गया है. सफाई कर्मियों का कहना है कि उन्हें EPF और ESI के लाभ से वंचित रखा जा रहा है, साथ ही उन्हें यूनिफॉर्म, आईडी कार्ड, फर्स्ट एड किट जैसी आवश्यक सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं.
- कर्मचारी भविष्य निधि और राज्य बीमा की राशि अब तक जमा नहीं
- सफाई कर्मियों को न्यूनतम मजदूरी से भी कम का हो रहा भुगतान
बक्सर टॉप न्यूज, बक्सर: नगर परिषद के सफाई कर्मियों के कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) की राशि उनकी मजदूरी से कटने के बावजूद उनके खातों में जमा नहीं की गई है. वहीं, पुरानी सफाई एजेंसी का कार्यकाल समाप्त होते ही नगर परिषद क्षेत्र की सफाई का जिम्मा एक नई एजेंसी को सौंप दिया गया है. सफाई कर्मियों का कहना है कि उन्हें EPF और ESI के लाभ से वंचित रखा जा रहा है, साथ ही उन्हें यूनिफॉर्म, आईडी कार्ड, फर्स्ट एड किट जैसी आवश्यक सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं.
नगर परिषद क्षेत्र में पहले सफाई का कार्य हर माह 84 लाख रुपये में हो रहा था, जबकि अब नई एजेंसी 24 महीना तक यह कार्य 1.16 करोड़ रुपये में करेगी. इसके बावजूद सफाई कर्मियों की मजदूरी न्यूनतम से भी कम तय की गई है. मजदूरों को प्रतिदिन 200, 300 और 400 रुपये की दर से भुगतान किया जा रहा है, जिससे वे ठगे से महसूस कर रहे हैं.
पुरानी एजेंसी ने नहीं जमा किए सात महीने के EPF और ESI के पैसे
नगर परिषद के विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, 31 जनवरी 2025 तक कार्यरत सफाई एजेंसी शिवम जन स्वास्थ्य एवं सर्वांगीण विकास केंद्र के अंतर्गत 147 पुराने सफाई कर्मियों को 400 रुपये प्रतिदिन, 350 नए सफाई कर्मियों को 304 रुपये प्रतिदिन तथा ई-रिक्शा चालक महिलाओं को 200 रुपये प्रतिदिन मजदूरी दी जा रही थी. इन सभी कर्मियों की EPF और ESI की राशि उनके मानदेय से कट रही थी, लेकिन बीते सात महीनों से यह राशि उनके खातों में जमा नहीं की गई.
इसी बीच, 1 फरवरी 2025 से मौर्या कार्स के द्वारा नगर की सफाई का कार्य शुरू कर दिया गया है.
पहले भी सफाई एजेंसी लेकर भाग चुकी है कर्मियों का पैसा
सूत्रों के अनुसार, पूर्व में सफाई कार्य संभालने वाली एजेंसी लखराज-राधिका इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, छपरा 15 सुपरवाइजर और 15 सफाई कर्मियों का एक महीने का वेतन और भविष्य निधि की राशि लेकर फरार हो चुकी है. हालांकि, एक साल से अधिक समय बीतने के बावजूद नगर परिषद ने इस राशि की वसूली के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है.
यह भी बताया जा रहा है कि उक्त सफाई एजेंसी का 54 लाख रुपये का भुगतान नगर परिषद ने रोक दिया था, जिसके कारण एजेंसी अब हाईकोर्ट चली गई है.
सफाई कर्मियों के साथ शोषण जारी – मजदूर संघ ने उठाई आवाज
बिहार प्रदेश सफाई कर्मचारी मजदूर संघ के जिलाध्यक्ष इंद्रजीत चौबे का कहना है कि सफाई कर्मियों का लगातार शोषण किया जा रहा है. उन्हें श्रम संसाधन विभाग द्वारा निर्धारित दैनिक मजदूरी नहीं दी जा रही, न ही उन्हें यूनिफॉर्म उपलब्ध कराई जा रही है. जब भी वे बकाया राशि के भुगतान की मांग करते हैं, तो उनकी आवाज अनसुनी कर दी जाती है. ऐसी स्थिति में आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता.
नई एजेंसी करेगी सभी नियमों का पालन – कार्यपालक पदाधिकारी
कार्यपालक पदाधिकारी आशुतोष कुमार गुप्ता ने बताया कि पुरानी एजेंसी के प्रतिनिधि जल्द ही नगर परिषद कार्यालय आएंगे, उनका भी कुछ भुगतान बकाया है. इस राशि से कर्मचारियों की EPF और ESI की रकम जमा कराई जाएगी. नई एजेंसी को सभी नियमों का पालन करने का निर्देश दिया गया है.
श्रम संसाधन विभाग द्वारा निर्धारित मजदूरी दरों के अनुसार सफाई कर्मियों को भुगतान किया जाएगा. साथ ही, उन्हें यूनिफॉर्म और आईडी कार्ड भी उपलब्ध कराया जाएगा. फर्स्ट एड किट की व्यवस्था नगर परिषद कार्यालय में की जाएगी.
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