वीडियो : "इंटिग्रेटिंग - रिवर्स, कल्चर, डेवलपमेंट" पुस्तक का विमोचन

उन्होंने गंगा नदी के विविध भौगोलिक परिदृश्य, जलविज्ञान, इसके समक्ष खड़े संकटों और उनके समाधान पर विस्तृत अध्ययन किया है. पुस्तक में छात्रों द्वारा तैयार किए गए शोध पत्रों को एकत्र कर एक समृद्ध संकलन तैयार किया गया है, जो गंगा नदी की समस्याओं और उसके संरक्षण के उपायों पर प्रकाश डालता है.










                                           


  • फाउंडेशन स्कूल के विद्यार्थियों ने छात्रों ने गंगा नदी पर किया गहन शोध
  • शिक्षा को सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों से जोड़ने पर जोर

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : फाउंडेशन स्कूल, बक्सर में आज एक ऐतिहासिक अवसर देखने को मिला, जब "इंटिग्रेटिंग - रिवर्स, कल्चर, डेवलपमेंट" पुस्तक का भव्य विमोचन किया गया. यह पुस्तक 20 विद्यार्थियों के गहन शोध और विश्लेषण का परिणाम है, जिसमें उन्होंने गंगा नदी के विविध भौगोलिक परिदृश्य, जलविज्ञान, इसके समक्ष खड़े संकटों और उनके समाधान पर विस्तृत अध्ययन किया है. पुस्तक में छात्रों द्वारा तैयार किए गए शोध पत्रों को एकत्र कर एक समृद्ध संकलन तैयार किया गया है, जो गंगा नदी की समस्याओं और उसके संरक्षण के उपायों पर प्रकाश डालता है.

विद्यालय के प्रिंसिपल विकास ओझा ने इस अवसर पर कहा कि नई शिक्षा नीति (NEP-2020) छात्रों को सामाजिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय मुद्दों से जोड़ने पर बल देती है. यह नीति छात्रों को उनके आसपास की वास्तविक समस्याओं से परिचित कराते हुए उन्हें समाधान ढूंढने की दिशा में प्रेरित करती है. उन्होंने कहा कि यह पुस्तक छात्रों के प्रयासों और उनकी शोध क्षमता को दर्शाती है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वे न केवल अकादमिक रूप से बल्कि सामाजिक रूप से भी जागरूक हो रहे हैं.

विद्यालय के उपप्रधानाचार्य मनोज त्रिगुण ने कहा कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि छात्रों में चिंतनशीलता, विश्लेषणात्मक क्षमता और तर्क शक्ति का विकास भी आवश्यक है. उन्होंने बताया कि यह पुस्तक न केवल गंगा नदी पर शोध करने का माध्यम बनी, बल्कि छात्रों को लेखन, अभिव्यक्ति और समस्या समाधान कौशल विकसित करने का अवसर भी दिया.

इस अवसर पर विद्यालय में आयोजित समारोह में विभिन्न अतिथियों ने भाग लिया और छात्रों के इस प्रयास की सराहना की. वक्ताओं ने कहा कि लेखन, विश्लेषण और डिबेट जैसे कौशल छात्रों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. ये कौशल उन्हें अपने विचारों को बेहतर तरीके से प्रस्तुत करने और सामाजिक मुद्दों पर विचार करने की क्षमता प्रदान करते हैं.

कार्यक्रम में मिलेनियम पब्लिक स्कूल से भरत, सनबीम स्कूल से रविंद्र सिंह, रेड क्रॉस सोसाइटी के सचिव श्रवण तिवारी, बिहार सेंट्रल स्कूल के सरोज कुमार, जनप्रतिनिधि इंद्र प्रताप सिंह और साबित खिदमत फाउंडेशन के दिलशाद आलम सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे. विद्यालय के निदेशक प्रदीप मिश्रा और डॉ. राजेश्वर सर ने भी छात्रों की इस पहल की प्रशंसा करते हुए इसे एक अनुकरणीय कार्य बताया.

इस मौके पर छात्रों के अभिभावकों ने भी इस पुस्तक लेखन की प्रक्रिया को सराहा और उनके प्रयासों की सराहना की. उन्होंने कहा कि यह पहल छात्रों के शिक्षण अनुभव को समृद्ध बनाने के साथ-साथ उन्हें पर्यावरण और सामाजिक मुद्दों के प्रति अधिक संवेदनशील बनाने में सहायक होगी. विद्यालय ने इस उपलब्धि को अपने शैक्षणिक दृष्टिकोण के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया और भविष्य में भी इस प्रकार के शोध आधारित प्रोजेक्ट्स को प्रोत्साहित करने की प्रतिबद्धता जताई.












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