वर्षों तक पुलिस की आंखों में धूल झोंकने वाला आरोपी आखिरकार कानून के शिकंजे में आ गया. यह गिरफ्तारी इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि कुछ ही दिन पहले बक्सर कोर्ट ने इसी मामले में चार आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी.
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| पुलिस गिरफ्त में आरोपी |
- वीर कुंवर सिंह कॉलोनी से दबोचा गया हरेंद्र सिंह हत्याकांड में फरार मुख्य साजिशकर्ता विकास वर्मा
- 12 लाख रुपये के लेनदेन में रची गई थी हत्या की साजिश, कोर्ट पहले ही सुना चुका है चार दोषियों को उम्रकैद
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : नौ साल पुराने हरेंद्र सिंह हत्याकांड में आखिरकार पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है. लंबे समय से फरार चल रहे इस सनसनीखेज मामले के मुख्य साजिशकर्ता विकास वर्मा को नगर थाना पुलिस ने शुक्रवार देर रात गुप्त सूचना के आधार पर वीर कुंवर सिंह कॉलोनी के पास से गिरफ्तार कर लिया. वर्षों तक पुलिस की आंखों में धूल झोंकने वाला आरोपी आखिरकार कानून के शिकंजे में आ गया. यह गिरफ्तारी इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि कुछ ही दिन पहले बक्सर कोर्ट ने इसी मामले में चार आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी.
इस संबंध में आयोजित प्रेस वार्ता में एसपी शुभम आर्य ने बताया कि 22 अगस्त 2016 की रात हरेंद्र सिंह बस स्टैंड से अपने घर सोहनीपट्टी लौट रहे थे. इसी दौरान पोखरा के पास अज्ञात बदमाशों ने उन्हें गोली मार दी. गंभीर रूप से घायल हरेंद्र सिंह की मौके पर ही मौत हो गई थी. इस घटना से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी. अगले दिन मृतक की पत्नी इंदू सिंह ने नगर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी, जिसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की.
उधार के 12 लाख रुपये लौटाने के बदले रची हत्या की साजिश
पुलिस जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि हत्या के पीछे जमीन से जुड़ा विवाद था. विकास वर्मा ने हरेंद्र सिंह से जमीन के नाम पर करीब 12 लाख रुपये उधार लिए थे. जब रुपये लौटाने का दबाव बढ़ा, तो रकम से बचने के लिए उसने हत्या की साजिश रच डाली. जांच में सामने आया कि पूरी वारदात सुनियोजित तरीके से अंजाम दी गई थी और इसमें कई लोग शामिल थे.
चार दोषियों को मिली है उम्रकैद की सजा
अदालत ने साक्ष्यों और 10 गवाहों की गवाही के आधार पर जिला परिषद सदस्य के पति सह प्रतिनिधि रिंकू यादव, रामाशीष उर्फ चतुरी, अजय कुमार पांडेय और जयराम पासवान को दोषी ठहराया था. कोर्ट ने चारों को भारतीय दंड विधान की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास, धारा 326 के तहत 10 वर्ष का कठोर कारावास और 27 आर्म्स एक्ट के तहत चार वर्ष की सजा सुनाई है. साथ ही पीड़िता को दो लाख रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया गया था. उस समय मुख्य साजिशकर्ता विकास वर्मा फरार चल रहा था, जिसे अब पुलिस ने कानून के हवाले कर दिया है.
स्पेशल टीम ने घेराबंदी कर दबोचा
एसपी शुभम आर्य के अनुसार, गुप्त सूचना मिलने के बाद एक स्पेशल टीम का गठन किया गया. टीम ने इलाके की घेराबंदी कर वीर कुंवर सिंह कॉलोनी के पास से विकास वर्मा को गिरफ्तार कर लिया. उन्होंने बताया कि आरोपी से गहन पूछताछ की जा रही है और इस गिरफ्तारी से हत्याकांड से जुड़े पूरे नेटवर्क और साजिश के अन्य पहलुओं के उजागर होने की उम्मीद है.
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