धान अधिप्राप्ति में पैक्सों की मनमानी, पूर्व विधायक गुन्ना तिवारी ने उठाई किसानों की आवाज ..

कहा है कि पैक्सों द्वारा किसानों से धान की अधिप्राप्ति खलिहान से न कराकर सीधे टैग मिल तक पहुंचाने का दबाव बनाया जा रहा है, जो नियम संगत नहीं है.







                                         


  • धान अधिप्राप्ति में पैक्सों की मनमानी पर पूर्व विधायक का जिलाधिकारी को पत्र
  • धान अधिप्राप्ति 2025-26 में किसानों के शोषण का लगाया आरोप
  • औचक निरीक्षण और वैकल्पिक एजेंसियों को अधिकृत करने की मांग

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : धान अधिप्राप्ति वर्ष 2025-26 के दौरान किसानों को हो रही परेशानियों और पैक्सों की कथित मनमानी को लेकर बक्सर सदर के पूर्व विधायक संजय कुमार तिवारी उर्फ गुन्ना तिवारी ने जिलाधिकारी को एक विस्तृत पत्र भेजा है. पत्र में उन्होंने धान खरीद प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी, किसानों के शोषण और बिचौलियों के बढ़ते प्रभाव पर गंभीर सवाल उठाते हुए मामले की जांच और त्वरित निराकरण की मांग की है.

पूर्व विधायक ने अपने पत्र में कहा है कि पैक्सों द्वारा किसानों से धान की अधिप्राप्ति खलिहान से न कराकर सीधे टैग मिल तक पहुंचाने का दबाव बनाया जा रहा है, जो नियम संगत नहीं है. टैग मिल पर पहुंचने के बाद किसानों को धान में नमी, पईया, तमड़ा और उचित चावल नहीं निकलने जैसे बहाने बनाकर परेशान किया जाता है. इससे किसानों को आर्थिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित होना पड़ रहा है.

उन्होंने आरोप लगाया कि धान अधिप्राप्ति के बाद किसानों को बिक्री की पावती रसीद नहीं दी जाती, जो न्यायसंगत नहीं है. इसके अलावा एक क्विंटल धान पर पांच किलो अतिरिक्त धान लिया जा रहा है और उसके बाद मनमाने तरीके से नमी की कटौती की जाती है. किसानों को अपने स्वयं के खरीदे गए बैग से धान की पैकिंग करनी पड़ती है तथा परिवहन और हवालन का पूरा खर्च भी स्वयं उठाना पड़ता है.

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि पैक्सों द्वारा थोपी गई सभी शर्तें पूरी करने के बावजूद किसानों को समर्थन मूल्य नहीं मिल पाता और उन्हें बाजार मूल्य पर ही धान बेचने के लिए मजबूर होना पड़ता है. रैयती और गैर रैयती किसानों की आड़ में बिचौलियों के माध्यम से धान खरीद कर पैक्स अपने लक्ष्य पूरे कर लेते हैं, जिससे वास्तविक किसान प्रभावित होते हैं और उन्हें औने-पौने दामों पर धान बेचना पड़ता है.

पूर्व विधायक ने मांग की है कि किसानों के हितों की रक्षा के लिए पैक्स क्रय केंद्रों पर औचक निरीक्षण कराया जाए, धान अधिप्राप्ति के समय ही किसानों को पावती रसीद हर हाल में दी जाए तथा प्रत्येक पंचायत में रैयती और गैर रैयती किसानों की सूची कृषि सलाहकारों से प्राप्त की जाए. साथ ही विस्कोगान और नेफेड जैसी अन्य सहकारी एजेंसियों को भी धान अधिप्राप्ति के लिए अधिकृत करने हेतु सरकार को पत्र भेजने की मांग की गई है, ताकि पैक्सों की मनमानी पर अंकुश लगाया जा सके.







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