अतिक्रमण की भेंट चढ़ता खेल मैदान, पंडितपुर में दम तोड़ती ग्रामीण खेल प्रतिभाएं ..

जिस भूमि पर गांव के बच्चों और युवाओं के लिए खेल मैदान विकसित होना था, वहां अब झोपड़ियां खड़ी कर दी गई हैं. इससे न केवल खेल गतिविधियां बाधित हो रही हैं, बल्कि मैदान निर्माण के लिए आवश्यक भूमि भी लगातार कम होती जा रही है.

मैदान में किया गया अतिक्रमण







                                         





  • झोपड़ियों के फैलाव से सिमटता मैदान, बच्चों और युवाओं के खेलने पर संकट
  • आवेदन पर कार्रवाई नहीं, अब उपमुख्यमंत्री को पत्र लिखने की तैयारी में ग्रामीण

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : सदर प्रखंड के पंडितपुर गांव में प्रस्तावित खेल मैदान का निर्माण अतिक्रमण के कारण अधर में लटक गया है. जिस भूमि पर गांव के बच्चों और युवाओं के लिए खेल मैदान विकसित होना था, वहां अब झोपड़ियां खड़ी कर दी गई हैं. इससे न केवल खेल गतिविधियां बाधित हो रही हैं, बल्कि मैदान निर्माण के लिए आवश्यक भूमि भी लगातार कम होती जा रही है. हालात यह हैं कि गांव की खेल प्रतिभाओं को निखारने का सपना अब धीरे-धीरे धुंधला पड़ता नजर आ रहा है.

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह मैदान पंडितपुर गांव के लिए बेहद अहम है. यहां वर्षों से बच्चे क्रिकेट, फुटबॉल और अन्य खेलों का अभ्यास करते रहे हैं. लेकिन बीते कुछ समय से मैदान में झोपड़ियां लगने लगीं. शुरुआत में एक-दो झोपड़ियां थीं, जिन्हें अस्थायी माना गया, लेकिन धीरे-धीरे इनकी संख्या बढ़ती चली गई. अब मैदान का बड़ा हिस्सा अतिक्रमण की चपेट में आ चुका है, जिससे खेलने वालों को गंभीर परेशानी हो रही है.

ग्रामीण मोहन पांडेय सहित अन्य लोगों का आरोप है कि अतिक्रमण हटाने को लेकर अंचल अधिकारी को कई बार आवेदन दिया गया. लिखित शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई. ग्रामीणों का कहना है कि जब सरकारी भूमि पर खुलेआम अतिक्रमण हो रहा है और प्रशासन आंख मूंदे बैठा है, तो इससे लोगों का भरोसा भी टूट रहा है.

ग्रामीणों के अनुसार, तत्कालीन जिलाधिकारी अंशुल अग्रवाल ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया था और अंचल अधिकारी को आवश्यक निर्देश दिए थे. इसके बावजूद जमीनी स्तर पर कोई बदलाव नजर नहीं आया. न झोपड़ियां हटाई गईं और न ही मैदान को अतिक्रमण मुक्त कराने की दिशा में कोई पहल हुई. इससे गांव में प्रशासनिक उदासीनता को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है.

स्थानीय लोगों का मानना है कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में खेल को बढ़ावा देने और युवाओं को सकारात्मक दिशा देने के लिए खेल मैदानों के निर्माण पर जोर दे रही है. ऐसे में पंडितपुर गांव का यह मामला सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत को उजागर करता है. यदि समय रहते अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो आने वाले दिनों में मैदान पूरी तरह समाप्त हो सकता है और गांव के बच्चे खेल से दूर हो जाएंगे.

ग्रामीणों ने अब अपनी लड़ाई को और आगे ले जाने का फैसला किया है. अतिक्रमण हटाने और खेल मैदान को सुरक्षित करने की मांग को लेकर उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा को पत्र लिखकर अपनी पीड़ा से अवगत कराने की तैयारी की जा रही है. वहीं, इस मामले में अंचल अधिकारी से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन नहीं उठने के कारण उनका पक्ष सामने नहीं आ सका. फिलहाल पंडितपुर गांव के लोग प्रशासन से ठोस कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठे हैं, ताकि खेल मैदान बच सके और गांव की खेल प्रतिभाओं को नया जीवन मिल सके.







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