चौसा थर्मल पावर मजदूर यूनियन कार्यालय में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई स्वामी विवेकानंद जयंती ..

कहा कि स्वामी विवेकानंद केवल एक संत या विचारक नहीं थे, बल्कि वे आधुनिक भारत के शिल्पकार और युवाशक्ति के सच्चे मार्गदर्शक थे. 






                                         


  • डॉ. मनोज यादव बोले– स्वामी विवेकानंद आधुनिक भारत के शिल्पकार और युवाशक्ति के मार्गदर्शक
  • श्रम की गरिमा, संगठन और आत्मनिर्भरता के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : जिले के चौसा थर्मल पावर मजदूर यूनियन के कार्यालय परिसर में स्वामी विवेकानंद जयंती पखवाड़ा के अंतर्गत वेदांत के विख्यात आध्यात्मिक गुरु, महान समाजचिंतक, राष्ट्रनिर्माता विचारक और युवाओं के शाश्वत प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद की जयंती श्रद्धा, सम्मान और उत्साह के साथ भव्य रूप से मनाई गई. कार्यक्रम की शुरुआत स्वामी विवेकानंद के तैलचित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर की गई, जिसके बाद उपस्थित लोगों ने उनके महान व्यक्तित्व और विचारधारा को नमन किया.

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए चौसा थर्मल पावर मजदूर यूनियन के महामंत्री डॉ. मनोज यादव ने कहा कि स्वामी विवेकानंद केवल एक संत या विचारक नहीं थे, बल्कि वे आधुनिक भारत के शिल्पकार और युवाशक्ति के सच्चे मार्गदर्शक थे. उन्होंने अपने ओजस्वी विचारों, कर्मठ जीवन और प्रखर राष्ट्रभक्ति से देश के युवाओं में आत्मविश्वास, स्वाभिमान और कर्तव्यबोध का संचार किया. डॉ. यादव ने कहा कि “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो” का संदेश आज भी युवाओं, श्रमिकों और समाज के हर वर्ग के लिए प्रेरणा का अक्षय स्रोत है.

उन्होंने आगे कहा कि स्वामी विवेकानंद जयंती पखवाड़ा केवल औपचारिक आयोजन भर नहीं है, बल्कि यह उनके विचारों को आत्मसात कर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का संकल्प लेने का अवसर है. वर्तमान समय में जब समाज बेरोजगारी, असमानता, शोषण और नैतिक पतन जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है, तब स्वामी विवेकानंद के शिक्षा, संगठन, श्रम की गरिमा, आत्मनिर्भरता और सामाजिक समरसता से जुड़े विचार पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गए हैं.

डॉ. मनोज यादव ने विशेष रूप से मजदूर वर्ग का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद श्रम को राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति मानते थे. उनका मानना था कि संगठित और जागरूक श्रमिक ही सशक्त राष्ट्र की नींव रखते हैं. इसी कारण मजदूरों और युवाओं को उनके विचारों से प्रेरणा लेकर एकता, अनुशासन और संगठन को मजबूत करना चाहिए.

उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे इस जयंती पखवाड़ा के दौरान स्वामी विवेकानंद के जीवन और दर्शन का अध्ययन करें और सामाजिक न्याय, समानता व राष्ट्र निर्माण की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाएं. यदि युवा और श्रमिक वर्ग संगठित होकर उनके बताए मार्ग पर चले, तो एक सशक्त, आत्मनिर्भर और समरस समाज का निर्माण निश्चित रूप से संभव है.

कार्यक्रम में प्रोफ़ेसर रमेश चंद्र श्रीवास्तव, लाल जी राम, विनोद कुमार यादव, श्रीभगवान राम, संजय राम, बबलू पाल, हवलदार चौधरी, सुनील कुमार राम, रामप्रवेश राजभर, वीरेंद्र राम, विजय राम, दिलबहार पासी, भरत पाण्डेय, विनय कानू, मुन्ना खरवार, कन्हैया मालाकार, रमेश चौधरी, कृष्णा मालाकार, नारायण माली, गोविन्द खरवार, श्रीमान नारायण पाण्डेय, बनारसी माली, शिवजी चौधरी सहित अन्य लोग उपस्थित रहे.







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