रेल अस्पताल खुद इलाज का इंतजार कर रहा है. यह तस्वीर सामने आई जब रेलयात्री कल्याण समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ सुधीर कुमार सिंह ने मंगलवार को बक्सर रेल अस्पताल का गहन निरीक्षण किया. निरीक्षण में अस्पताल की बदहाली ने सबको चौंका दिया.
- विश्वस्तरीय स्टेशन का सपना, लेकिन रेल अस्पताल बेहाल
- दानापुर से डीडीयू के बीच इकलौता अस्पताल, वो भी बदहाल
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : एक तरफ बक्सर स्टेशन को विश्वस्तरीय बनाने की घोषणाएं, दूसरी तरफ दानापुर से डीडीयू जंक्शन के बीच एकमात्र बक्सर रेल अस्पताल खुद इलाज का इंतजार कर रहा है. यह तस्वीर सामने आई जब रेलयात्री कल्याण समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ सुधीर कुमार सिंह ने मंगलवार को बक्सर रेल अस्पताल का गहन निरीक्षण किया. निरीक्षण में अस्पताल की बदहाली ने सबको चौंका दिया.
डॉ सिंह ने बताया कि दानापुर से झाझा के बीच महज 186 किलोमीटर की दूरी में सात रेल अस्पताल मौजूद हैं, जबकि दानापुर से दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन तक 221 किलोमीटर के लंबे हिस्से में केवल बक्सर रेल अस्पताल है, वह भी सुविधाविहीन. अस्पताल की इमारत अंग्रेजों के जमाने की लगभग 200 वर्ष पुरानी है. हल्की बारिश में ही छत से पानी टपकने लगता है, जिससे मरीजों और कर्मचारियों दोनों को परेशानी होती है.
निरीक्षण में यह भी सामने आया कि गंभीर रोगियों के लिए रात में रुकने की कोई व्यवस्था नहीं है. दवाओं की भी पर्याप्त उपलब्धता नहीं हो पा रही है, जिससे रेलकर्मियों को मजबूरी में बाहर इलाज कराना पड़ता है. इसके साथ ही डॉक्टर और अन्य स्टाफ की भारी कमी भी सामने आई, जिससे अस्पतालकर्मी भी दबाव में काम करने को मजबूर हैं.
डॉ सुधीर कुमार सिंह ने कहा कि यह स्थिति बक्सर के जनप्रतिनिधियों की उदासीनता का नतीजा है. जब स्टेशन को विश्वस्तरीय बनाने की बातें हो रही हैं, तब एकमात्र रेल अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं का अभाव बेहद शर्मनाक है. उन्होंने मंडल रेल प्रबंधक से जर्जर भवन को संज्ञान में लेकर नए अस्पताल भवन के निर्माण की मांग की.
वहीं मौके पर मौजूद बक्सर शाखा के संयोजक वीरेंद्र ओझा ने चेतावनी दी कि यदि रेल अस्पताल की बदहाली दूर नहीं की गई तो विशाल धरना-प्रदर्शन किया जाएगा. इसके बाद भी अगर दानापुर रेल प्रबंधन नहीं जागा तो मंडल कार्यालय का घेराव किया जाएगा.
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