तटबंध निर्माण में अनियमितता का आरोप, प्रमुख ने डीएम से की उच्च स्तरीय जांच की मांग ..

यह भी उल्लेख किया गया है कि बांध की ऊंचाई कम नहीं की जानी चाहिए, बल्कि अतिरिक्त मिट्टी डालकर उसे मजबूत किया जाना चाहिए. इसके विपरीत जेसीबी मशीन से तटबंध की मौजूदा मिट्टी को ही उधेड़कर समतल किया जा रहा है.






                                         


- बक्सर-कोईलवर योजना पर उठे सवाल, अवैध खनन से गांवों पर मंडराया खतरा 

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : सदर प्रखण्ड क्षेत्र में चल रही सरकार की महत्वाकांक्षी बक्सर-कोईलवर तटबंध सुदृढ़ीकरण एवं सड़क निर्माण योजना पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं. प्रखण्ड प्रमुख ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर निर्माण कार्य और गंगा नदी में बन रहे कटाव निरोधक कार्यों की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है. साथ ही तटवर्ती गांवों में जारी अवैध खनन पर भी कड़ी कार्रवाई की अपील की गई है.

सदर प्रखण्ड की प्रमुख फुलपातो देवी ने शनिवार को भेजे पत्र में कहा है कि बक्सर-कोईलवर तटबंध का सुदृढ़ीकरण और मुख्य सड़क मार्ग से जोड़ने का कार्य लाखों लोगों के हित से जुड़ा है, लेकिन निर्माण एजेंसी द्वारा घोर अनियमितता बरती जा रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि किसी भी योजना के लिए सूचना बोर्ड लगाना अनिवार्य होता है, लेकिन कार्यस्थल पर बोर्ड नहीं लगाया गया है.

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि बांध की ऊंचाई कम नहीं की जानी चाहिए, बल्कि अतिरिक्त मिट्टी डालकर उसे मजबूत किया जाना चाहिए. इसके विपरीत जेसीबी मशीन से तटबंध की मौजूदा मिट्टी को ही उधेड़कर समतल किया जा रहा है. इससे बांध की मजबूती पर सवाल खड़े हो रहे हैं. प्रमुख के अनुसार, तटबंध की सुरक्षा के लिए उपयोग किए जा रहे बैग और रस्सियों में भी मानक का पालन नहीं हो रहा है. बैग में सफेद बालू की जगह लगभग 80 प्रतिशत मिट्टी भरी जा रही है, जो बरसात के समय गल सकती है.

प्रमुख ने मझरिया, उमरपुर 60 के डेरा और केशोपुर जैसे तटवर्ती इलाकों में अवैध खनन को भी गंभीर खतरा बताया है. उनका कहना है कि दिन-रात अवैध खनन हो रहा है, लेकिन सूचना देने के बावजूद विभागीय अधिकारी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं. उन्होंने आशंका जताई कि समय रहते रोकथाम नहीं हुई तो इन गांवों की स्थिति भोजपुर जिला के जवनिया जैसी हो सकती है.

साथ ही गंगा नदी में बन रहे कटाव निरोधक एकर में भी मिट्टी भरे बैग के प्रयोग का आरोप लगाते हुए इसकी जांच की मांग की गई है. प्रमुख ने जिलाधिकारी से स्वयं या उच्च स्तरीय टीम गठित कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने का आग्रह किया है.








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