नए महंत के गद्दी संभालते ही न्यास भूमि पर सड़क का विवाद, बड़ी मठिया ने खोला मोर्चा ..

न्यास की रैयती जमीन पर जबरन पथ निर्माण का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. नया बाजार वार्ड संख्या 4 स्थित भूमि पर मिट्टी डालकर रास्ता बनाने के प्रयास को लेकर बड़ी मठिया प्रबंधन ने इसे गंभीर साजिश बताते हुए प्रशासन और धार्मिक न्यास परिषद से हस्तक्षेप की मांग की है.







                                         



– नया बाजार वार्ड 4 की रैयती जमीन पर मिट्टी डालकर रास्ता बनाने का आरोप
– प्रबंधक केदारनाथ सिंह ने धार्मिक न्यास परिषद व डीएम से की उच्चस्तरीय जांच की मांग

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : एक ओर बड़ी मठिया रामरेखा घाट में नए उत्तराधिकारी के रूप में श्यामादास के विधिवत गद्दीनशीं होने की प्रक्रिया पूरी हुई, वहीं दूसरी ओर न्यास की रैयती जमीन पर जबरन पथ निर्माण का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. नया बाजार वार्ड संख्या 4 स्थित भूमि पर मिट्टी डालकर रास्ता बनाने के प्रयास को लेकर बड़ी मठिया प्रबंधन ने इसे गंभीर साजिश बताते हुए प्रशासन और धार्मिक न्यास परिषद से हस्तक्षेप की मांग की है.



न्यास कार्यालय, बड़ी मठिया रामरेखा घाट, बक्सर की ओर से जिला पदाधिकारी को दिए गए पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि मौजा पाण्डेयपड्डी, थाना संख्या 324, खाता संख्या 315 (नया सर्वे 43/पुराना सर्वे), खेसरा संख्या 602 नया एवं 992 पुराना की जमीन न्यास की रैयती संपत्ति है. आरोप है कि 20 जनवरी 2026 को भक्तों से सूचना मिलने पर जब स्थल का निरीक्षण किया गया तो पाया गया कि भूखंड के बीचों-बीच मिट्टी डालकर उसे दो हिस्सों में बांटने की कोशिश की गई है.

इस पूरे घटनाक्रम को और संवेदनशील इसलिए माना जा रहा है क्योंकि हाल ही में 1008 महंत श्री चन्द्रमादास के परमपद के बाद उनके उत्तराधिकारी के रूप में श्यामादास को चादर-पगड़ी के साथ विधि-विधान से गद्दी पर आसीन कराया गया. इस प्रक्रिया में जिला प्रशासन, अनुमंडल प्रशासन और पुलिस प्रशासन की उपस्थिति और सहयोग भी रहा. लेकिन महंत के निधन के शोक के बीच ही भूमि पर इस प्रकार की गतिविधि सामने आने से भक्तों में आक्रोश है.

प्रबंधक केदारनाथ सिंह ने आरोप लगाया है कि नगर परिषद कार्यालय द्वारा किसी टेंडर के नाम पर यह कार्य कराया जा रहा है, जबकि न तो न्यास कार्यालय और न ही न्यास परिषद को कोई पूर्व सूचना दी गई. इसे सरकारी निधि के संभावित दुरुपयोग और किसी खास व्यक्ति को निजी लाभ पहुंचाने की साजिश बताया गया है.

पत्र में बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950, भूमि अधिग्रहण विधि और नगर परिषद के प्रावधानों के उल्लंघन का भी जिक्र किया गया है. प्रबंधक ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए धार्मिक न्यास परिषद, पटना से भी हस्तक्षेप का अनुरोध किया है.

न्यास ने मांग की है कि संबंधित टेंडर को तत्काल निरस्त किया जाए, रैयती जमीन से डाली गई मिट्टी हटाई जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई हो. इस संबंध में प्रतिलिपि अनुमंडल पदाधिकारी बक्सर और नगर परिषद कार्यपालक पदाधिकारी बक्सर को भी भेजी गई है.

अब देखना होगा कि प्रशासन और धार्मिक न्यास परिषद इस संवेदनशील प्रकरण में क्या रुख अपनाते हैं, क्योंकि मामला आस्था, संपत्ति और कानून—तीनों से जुड़ा हुआ है.







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