पुलिस ने उस समय कथित तौर पर अवैध हथियार की बरामदगी दिखाते हुए कार्रवाई की थी. हालांकि, सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों ने अभियोजन की कहानी पर कई सवाल खड़े कर दिए.
- -पंचायत चुनाव 2016 के दौरान दर्ज आर्म्स एक्ट मामले में साक्ष्य पड़े कमजोर
- जब्ती प्रक्रिया की तकनीकी खामियों पर उठा सवाल, अदालत ने दिया संदेह का लाभ
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : लगभग एक दशक पुराने आर्म्स एक्ट मामले में अदालत ने अहम फैसला सुनाते हुए ब्रह्मर्षि समाज के बक्सर जिलाध्यक्ष राकेश राय उर्फ कल्लू राय को दोषमुक्त करार दिया है. लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद कोर्ट नं.-4 के न्यायाधीश चंदन कुमार की अदालत ने यह माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को ठोस साक्ष्यों के आधार पर साबित करने में असफल रहा.
मामला वर्ष 2016 का है, जब पंचायत चुनाव के दौरान राकेश राय उर्फ कल्लू राय के खिलाफ हथियार बरामदगी का आरोप लगाते हुए आर्म्स एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी. पुलिस ने उस समय कथित तौर पर अवैध हथियार की बरामदगी दिखाते हुए कार्रवाई की थी. हालांकि, सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों ने अभियोजन की कहानी पर कई सवाल खड़े कर दिए.
अदालत के समक्ष यह बात सामने आई कि हथियार की कथित बरामदगी और जब्ती की प्रक्रिया में निर्धारित कानूनी प्रावधानों का पालन नहीं किया गया. इसके अलावा, अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयान भी एक-दूसरे से मेल नहीं खाते पाए गए, जिससे आरोप संदेह के घेरे में आ गए.
न्यायालय ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि आपराधिक मामलों में आरोपी को तभी दोषी ठहराया जा सकता है, जब आरोप संदेह से परे प्रमाणित हों. साक्ष्यों की कमजोरी और प्रक्रिया संबंधी त्रुटियों को देखते हुए अदालत ने राकेश राय उर्फ कल्लू राय को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का आदेश दिया.
मामले में बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता धीरज कुमार ने प्रभावी पैरवी की. अदालत के इस फैसले के बाद आरोपी पक्ष में संतोष देखा गया, वहीं इस निर्णय को न्यायिक निष्पक्षता का उदाहरण माना जा रहा है.




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