यह भी निर्देश दिया है कि न्यास के नाम से तत्काल किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोला जाए और आश्रम से संबंधित सभी वित्तीय लेन-देन, आय-व्यय उसी खाते के माध्यम से किया जाए.
- धार्मिक न्यास पर्षद ने जारी किया आदेश, तत्काल प्रभाव से अस्थायी न्यासधारी नियुक्त
- राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोलकर सभी लेन-देन उसी से करने का निर्देश
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : रामरेखा घाट स्थित श्री विश्वामित्र आश्रम (बड़ी मठिया) में महंत चन्द्रमा दास के स्वर्गारोहण के बाद उत्पन्न प्रशासनिक शून्य को भरने के लिए बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद ने बड़ा फैसला लिया है.=पर्षद ने आदेश जारी कर जिलाधिकारी, बक्सर को तत्काल प्रभाव से आश्रम का अस्थायी न्यासधारी नियुक्त कर दिया है, ताकि आश्रम का संचालन सुचारू रूप से चलता रहे. हालांकि हाल ही में नए महंत की चादरपोशी हुई थी ऐसे में यह नया आदेश चर्चा का विषय बन गया है.
दरअसल, बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद की ओर से 11 फरवरी 2026 को जारी आदेश में कहा गया है कि श्री विश्वामिश्र आश्रम, बड़ी मठिया, रामरेखा घाट, बक्सर, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 34 के अंतर्गत निबंधित सार्वजनिक धार्मिक न्यास है.
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि महंत चन्द्रमा दास के निधन के कारण वर्तमान में महंत का पद रिक्त हो गया है. ऐसी स्थिति में न्यास के कुशल संचालन एवं सम्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 33 के तहत जिलाधिकारी को अस्थायी न्यासधारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
तत्काल बैंक में खाता खोलने तथा संचालन के निर्देश
पर्षद ने यह भी निर्देश दिया है कि न्यास के नाम से तत्काल किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोला जाए और आश्रम से संबंधित सभी वित्तीय लेन-देन, आय-व्यय उसी खाते के माध्यम से किया जाए. इससे आश्रम की आर्थिक पारदर्शिता और प्रशासनिक नियंत्रण सुनिश्चित होगा.
आदेश पर पर्षद के अध्यक्ष प्रो. रणवीर नंदन के हस्ताक्षर हैं. इसकी प्रतिलिपि जिलाधिकारी, बक्सर को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रेषित कर दी गई है.
बड़ी मठिया के प्रबंधक ने कहा - पूर्व से तय थे उत्तराधिकारी
इस मामले में बड़ी मठिया के प्रबंधक केदार नाथ सिंह ने कहा कि रामानंदी संप्रदाय की परंपरा और विधि-विधान से श्री श्यामा दास जी को महंत बनाया गया है. इसके अतिरिक्त दिवंगत महंत चंद्रमा दास के द्वारा पूर्व में ही अपना उत्तराधिकारी ने सौंप जाने के लिए कागजात तैयार किया है, वह कागजात जब तक निरस्त नहीं होता है तब तक यहां पद रिक्त नहीं है. धार्मिक न्यास परिषद क्या करता है यह देखने वाली बात होगी.




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