सेंट्रल जेल में सुधार की रंगत, होली पर उड़ेगा ‘हर्बल गुलाल’ ..

जेल में बन रहे इस गुलाल की खासियत यह है कि यह त्वचा के लिए सुरक्षित है और पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचाता. इस गुलाल को रखने के लिए कपड़ों से बने आकर्षक बैग भी तैयार किए गए हैं, जो प्लास्टिक के उपयोग को कम करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है.






                                         


- मुक्ति आउटलेट पर बिकेंगे बंदियों के हाथों से बने गुलाल और कपड़े के बैग
- 50 ग्राम 25 रुपये में, 100 ग्राम 45 रूपये में होगा उपलब्ध 

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : सुधार और पुनर्वास की दिशा में बढ़ते हुए सेंट्रल जेल बक्सर के बंदी इस बार होली के रंगों से समाज को नई सोच का संदेश देंगे. दीपावली के बाद अब होली के अवसर पर केंद्रीय कारा में बंदियों द्वारा हर्बल गुलाल तैयार किया जा रहा है, जिसे आम जनता के बीच बिक्री के लिए ‘मुक्ति आउटलेट’ में रखा जाएगा.

कारा एवं सुधार विभाग पूर्व से ही बंदियों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रहा है. इसी कड़ी में कुछ जेल परिसर में तैयार उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने की पहल भी की गई है. बीते वर्ष दीपावली के दौरान बंदियों ने मिट्टी के दिए और लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाएं तैयार कर बेची थीं, जिसे लोगों का अच्छा प्रतिसाद मिला था.


इस बार होली के मौके पर बंदियों द्वारा प्राकृतिक तत्वों से हर्बल गुलाल बनाया जा रहा है. जेल में बन रहे इस गुलाल की खासियत यह है कि यह त्वचा के लिए सुरक्षित है और पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचाता. इस गुलाल को रखने के लिए कपड़ों से बने आकर्षक बैग भी तैयार किए गए हैं, जो प्लास्टिक के उपयोग को कम करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है.

25 रुपये खर्च कर प्राप्त कर सकते हैं प्राकृतिक गुलाल

कारा अधीक्षक ज्ञानिता गौरव ने बताया कि 50 ग्राम का पैकेट 25 रुपये तथा 100 ग्राम का पैकेट 45 रुपये में उपलब्ध होगा. कारा अधीक्षक के मुताबिक इस पहल का उद्देश्य बंदियों को आत्मनिर्भर बनाना और उनके भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना है, ताकि सजा पूरी होने के बाद वे समाज में सम्मानजनक जीवन जी सकें.

कारा एवं सुधार विभाग की अनोखी पहल है 'मुक्ति'

कारा एवं सुधार विभाग के द्वारा 'मुक्ति’ नाम से की गई इस पहल के द्वारा बंदी कपड़े, साबुन, फिनाइल, तेल, मसाले, अगरबत्ती, सत्तू-बेसन, क्लीनर और फर्नीचर जैसे उपयोगी उत्पाद तैयार कर रहे हैं और कारा भवन के बाहरी परिसर में संचालित हो रहे मुक्ति आउटलेट के माध्यम से बाजार से कम दाम पर लोगों तक पहुंचाया रहे हैं.


बंदियों को मिल रही सुधार की दिशा, समाज को सुरक्षित उत्पाद

पूर्व लोक अभियोजक नन्द गोपाल प्रसाद कहते हैं कि सुधार की इस रंगीन पहल से न केवल बंदियों को रोजगार का अवसर मिल रहा है, बल्कि समाज को भी सुरक्षित और स्वदेशी उत्पाद मिल रहे हैं. इस होली, बक्सर की सेंट्रल जेल से निकले रंग शायद कई जिंदगियों में नई उम्मीद की छटा बिखेर दें.







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