रामरेखा घाट बड़ी मठिया के महंत श्यामा दास बने डिब्रूगढ़ हनुमान गढ़ी के महंत ..

कहा कि भक्तों के बिना भगवान भी अधूरे हैं. ऐसे में महंत बनने के बाद उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है कि भक्तों को किसी प्रकार की असुविधा न हो. उन्होंने कहा कि वह इस दायित्व को पूरी निष्ठा से निभाएंगे.

महंत श्यामा दास जी महाराज तथा रामरेखा घाट छोटी मठिया के महंत अनुग्रह नारायण दास जी महाराज 






                                 




  • धार्मिक परंपराओं के तहत चादरपोशी कर उत्तराधिकार की प्रक्रिया पूरी
  • अयोध्या सहित विभिन्न स्थानों से पहुंचे संतों ने जताई खुशी, सेवा परंपरा को आगे बढ़ाने की उम्मीद

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : नगर के रामरेखा घाट स्थित प्राचीन बड़ी मठिया से जुड़े संत श्यामा दास जी महाराज को अब असम के डिब्रूगढ़ स्थित हनुमान गढ़ी मंदिर का महंत नियुक्त किया गया है. इस अवसर पर श्रद्धालु भक्तों और संत समाज की उपस्थिति में विधि-विधान के साथ चादरपोशी कर उन्हें महंत की जिम्मेदारी सौंपी गई.

कार्यक्रम में रामरेखा घाट बड़ी मठिया के प्रबंधक केदार नाथ सिंह और छोटी मठिया के महंत अनुग्रह नारायण दास समेत कई संत मौजूद रहे. बड़ी मठिया के प्रबंधक केदारनाथ सिंह ने बताया कि संत समाज और प्रबुद्धजनों की मौजूदगी में धार्मिक परंपराओं के अनुसार उत्तराधिकार की पूरी प्रक्रिया संपन्न की गई. यह आयोजन सुबह से शुरू होकर देर रात तक चलता रहा.

इस मौके पर अयोध्या सहित विभिन्न स्थानों से संत और महंत डिब्रूगढ़ पहुंचे थे. सभी ने श्यामा दास महाराज को महंत बनाए जाने पर हर्ष व्यक्त किया और विश्वास जताया कि उनके नेतृत्व में रामरेखा घाट बड़ी मठिया के साथ-साथ डिब्रूगढ़ स्थित हनुमान गढ़ी मंदिर की धार्मिक परंपराएं और सेवा कार्य निरंतर आगे बढ़ते रहेंगे.

नवनियुक्त महंत श्यामा दास जी महाराज ने कहा कि भक्तों के बिना भगवान भी अधूरे हैं. ऐसे में महंत बनने के बाद उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है कि भक्तों को किसी प्रकार की असुविधा न हो. उन्होंने कहा कि वह इस दायित्व को पूरी निष्ठा से निभाएंगे, हालांकि इसमें भक्तों के सहयोग की भी आवश्यकता है, ताकि भगवान की राग-भोग और पूजा-आरती नियमित रूप से होती रहे.

उल्लेखनीय है कि बक्सर के रामरेखा घाट के समीप स्थित बड़ी मठिया के पूर्व महंत चंद्रमा दास का हाल ही में निधन हो गया था. लगभग 90 वर्षीय महंत पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे. हार्ट अटैक के बाद उनका इलाज जारी था और बेहतर उपचार के लिए पटना स्थित आईजीआईएमएस हृदय रोग संस्थान ले जाने के दौरान उन्हें पुनः हार्ट अटैक हुआ, जिसके बाद चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.











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