उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में जो मिट्टी खनन किया जा रहा था, वह पूरी तरह अवैध था. नगर परिषद के कनीय अभियंता भूलन यादव ने भी इसकी पुष्टि की है.
- देर रात पुलिस कार्रवाई में पांच लोग गिरफ्तार, नगर परिषद से मांगा गया जवाब
- कार्य पूरा होने के बावजूद जारी थी खुदाई, पूर्व वार्ड पार्षद ने अधिकारियों पर उठाए सवाल
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : नगर के नया बस स्टैंड के समीप स्थित सिंगरहिया तालाब में अवैध मिट्टी खनन का मामला सामने आया है. नगर थाने की पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक जेसीबी मशीन, दो मिट्टी लदे ट्रैक्टर को जब्त कर लिया. साथ ही मौके से पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस सभी से पूछताछ कर रही है.
जानकारी देते हुए नगर थानाध्यक्ष मनोज कुमार सिंह ने बताया कि मंगलवार की देर रात करीब तीन बजे सूचना मिली कि तालाब में अवैध रूप से मिट्टी की खुदाई की जा रही है. सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और कार्रवाई करते हुए पांच लोगों को पकड़ लिया. गिरफ्तार लोगों में दो ट्रैक्टर चालक, एक जेसीबी ऑपरेटर तथा दो अन्य लोग शामिल हैं, जो मिट्टी कटाई का कार्य करवा रहे थे.
थानाध्यक्ष ने बताया कि पूछताछ के दौरान पकड़े गए लोगों ने दावा किया कि वे नगर परिषद के निर्देश पर काम कर रहे थे. इसके बाद नगर परिषद से इस संबंध में जवाब मांगा गया है. उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. यदि कोई वैध आदेश प्रस्तुत नहीं किया गया तो सभी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी, अन्यथा पीआर बॉन्ड पर छोड़ने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी.
कार्य समाप्त होने के बाद भी जारी थी खुदाई
इस मामले में नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी कुमार ऋत्विक ने बताया कि नगर परिषद द्वारा पोखर की खुदाई का कार्य पहले कराया गया था, लेकिन वह कार्य अब पूरा हो चुका है और उसकी मापी पुस्तिका भी तैयार कर ली गई है. उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में जो मिट्टी खनन किया जा रहा था, वह पूरी तरह अवैध था. नगर परिषद के कनीय अभियंता भूलन यादव ने भी इसकी पुष्टि की है.
सात मई को भी उठ चुका था मामला
सिंगरहिया तालाब में अवैध मिट्टी खनन का यह पहला मामला नहीं है. इससे पहले सात मई की रात में भी इसी स्थान पर अवैध खनन की शिकायत सामने आई थी. पूर्व वार्ड पार्षद राकेश सिंह ने उस समय एसडीएम अविनाश कुमार से शिकायत की थी, लेकिन तब कोई कार्रवाई नहीं हुई थी. पूर्व पार्षद ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में कहीं न कहीं अधिकारियों की मिलीभगत भी हो सकती है.






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