डायट डुमरांव में शिक्षकों के लिए दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित..

कहा कि बदलते शैक्षिक परिदृश्य में शिक्षक प्रशिक्षण को अधिक प्रासंगिक, परिणामोन्मुख और नवाचार आधारित बनाने की जरूरत है. उन्होंने कार्यशाला में तैयार निष्कर्षों को भविष्य के प्रशिक्षण मॉड्यूल निर्माण के लिए महत्वपूर्ण बताया.







                                 

  • आवश्यकता आधारित प्रशिक्षण पर दिया गया जोर
  • शिक्षण गुणवत्ता सुधार को लेकर विशेषज्ञों ने रखे विचार

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : शिक्षकों के प्रशिक्षण को उनकी वास्तविक आवश्यकता के अनुरूप अधिक व्यावहारिक और उपयोगी बनाने के उद्देश्य से जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान (डायट) डुमरांव में द्वितीय चरण की दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन सर्व शिक्षा अभियान के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी चंदन कुमार द्विवेदी और डायट डुमरांव के प्राचार्य विवेक कुमार मौर्य ने संयुक्त रूप से किया, जिसमें शिक्षण गुणवत्ता सुधार पर विशेष चर्चा हुई.

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला कार्यक्रम पदाधिकारी चंदन कुमार द्विवेदी ने कहा कि शिक्षकों की आवश्यकता आधारित प्रशिक्षण व्यवस्था से विद्यालयों में शिक्षण-अधिगम की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार संभव है. उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशिक्षण तभी प्रभावी होगा जब वह शिक्षकों के वास्तविक कक्षा अनुभव, चुनौतियों और अपेक्षाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया जाए.

वहीं डायट के प्राचार्य विवेक कुमार मौर्य ने कहा कि बदलते शैक्षिक परिदृश्य में शिक्षक प्रशिक्षण को अधिक प्रासंगिक, परिणामोन्मुख और नवाचार आधारित बनाने की जरूरत है. उन्होंने कार्यशाला में तैयार निष्कर्षों को भविष्य के प्रशिक्षण मॉड्यूल निर्माण के लिए महत्वपूर्ण बताया.

कार्यशाला के समन्वयक एवं वरीय व्याख्याता नवनीत कुमार सिंह ने जानकारी दी कि प्रथम चरण में तैयार मूल्यांकन प्रपत्र के माध्यम से चयनित शिक्षकों से प्राप्त आंकड़ों का गहन विश्लेषण कर उनकी प्राथमिक प्रशिक्षण आवश्यकताओं की पहचान की गई है. इसी आधार पर आगामी प्रशिक्षण कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जाएगी, जिससे प्रशिक्षण अधिक प्रभावी बन सके.

गौरतलब है कि पहले चरण की कार्यशाला में शिक्षकों की आवश्यकता चिन्हित करने के लिए मूल्यांकन प्रपत्र तैयार किया गया था. इसके बाद यादृच्छिक रूप से चयनित शिक्षकों से उनकी शैक्षणिक और पेशेवर आवश्यकताओं से जुड़ी जानकारी एकत्र की गई. द्वितीय चरण की इस कार्यशाला में इन आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए विभिन्न रूब्रिक्स और प्रशिक्षण रणनीतियों के निर्माण पर विचार-विमर्श किया गया.

कार्यशाला में समन्वयक नवनीत कुमार सिंह, विषय विशेषज्ञ मनोज त्रिपाठी और राम सज्जन सिंह सहित जिले के विभिन्न स्तरों के 12 शिक्षक सहभागी रहे. प्रतिभागियों में विमल कुमार सिंह, डॉ. मृत्युंजय राय, पवन कुमार मिश्रा, मो. इमाम अली, राजेश कुमार राय, रविशंकर गुप्ता, संदीप आर्य, अनमोल कुमार और अजीत कुमार ने सक्रिय सहभागिता निभाई.











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