सफाई घोटाले में नया मोड़, एजेंसी ने विभाग पर ही लगाए गंभीर आरोप ..

कहा कि शुक्रवार को व्हाट्सएप पर नोटिस भेजने की बात जैसे ही जिला शिक्षा पदाधिकारी तक पहुंची उन्होंने आनन-फानन में दिन में 03:28 बजे दिन में ई मेल के माध्यम से नोटिस भेज दिया.

 





                               




  • व्हाट्सएप नोटिस को बताया गैरकानूनी, ब्याज सहित वसूली आदेश पर उठाए सवाल
  • निगरानी जांच की मांग, भुगतान प्रक्रिया में अधिकारियों की भूमिका पर घेरा

बक्सर टॉप न्यूज, बक्सर : जिले में स्कूलों की सफाई से जुड़े घोटाले में अब नया मोड़ आ गया है. जहां एक ओर शिक्षा विभाग ने एजेंसी पर कार्रवाई की, वहीं अब संबंधित एजेंसी ने ही विभागीय अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर दी है.

सफाई कार्य से जुड़ी एजेंसी M/S R.S. Enterprises के प्रोपराइटर राहुल प्रकाश ने जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) को पत्र भेजकर विभागीय कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि राजपुर और ब्रह्मपुर प्रखंड में उनकी संस्था द्वारा नियमित रूप से सफाई कार्य कराया गया, लेकिन इसके बावजूद अचानक 13.04.2026 को व्हाट्सएप के माध्यम से नोटिस भेजकर 12.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ तीन दिनों के भीतर राशि जमा करने का आदेश दे दिया गया, जो पूरी तरह से नियमों के विरुद्ध है. राहुल प्रकाश ने कहा कि शुक्रवार को व्हाट्सएप पर नोटिस भेजने की बात जैसे ही जिला शिक्षा पदाधिकारी तक पहुंची उन्होंने आनन-फानन में दिन में 03:28 बजे दिन में ई मेल के माध्यम से नोटिस भेज दिया.


एजेंसी ने यह भी दावा किया है कि विभाग द्वारा 15 प्रतिशत जुर्माना लगाने और एकरारनामा रद्द करने की कार्रवाई भी संदिग्ध है, क्योंकि वर्ष 2023 के बाद किसी प्रकार का वैध एकरारनामा ही नहीं हुआ. ऐसे में कार्रवाई को एजेंसी ने विभागीय अनियमितता और लापरवाही का परिणाम बताया है.

राहुल प्रकाश ने अपने पत्र में यह भी स्पष्ट किया कि भुगतान की प्रक्रिया में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी और जिला शिक्षा पदाधिकारी के स्तर से अनुमोदन के बाद ही राशि जारी होती है. ऐसे में यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी हुई है, तो इसकी जिम्मेदारी केवल एजेंसी पर डालना उचित नहीं है. ये तीन अधिकारियों की मिलीभगत से की गई गड़बड़ी है.

गौरतलब है कि इससे पहले विभागीय जांच में कई विद्यालयों में बिना सफाई कार्य के भुगतान किए जाने की पुष्टि हुई थी और एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने सहित वसूली का आदेश जारी किया गया था. वहीं सूत्रों के अनुसार इस पूरे मामले में बड़ी वित्तीय गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है.

अब एजेंसी ने निगरानी विभाग, पटना और जिला पदाधिकारी बक्सर से पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है. एजेंसी का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो यह मामला और बड़ा वित्तीय घोटाला साबित हो सकता है. एजेंसी ने पटना उच्च न्यायालय में रिट दायर कर दी है.

इस नए मोड़ के बाद मामला और पेचीदा हो गया है. अब यह देखना अहम होगा कि जांच का दायरा किस स्तर तक जाता है और आखिरकार इस घोटाले में शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर जिम्मेदारी तय होती है या नहीं?

उधर जिला शिक्षा पदाधिकारी संदीप रंजन ने कहा हैं कि कंपनी को ब्लैकलिस्ट किए जाने के बाद वह अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं. 













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