वीडियो : नगर परिषद में 300 करोड़ के फंड से लेकर टेंडर तक पर घोटाले का आरोप, पार्षद चक्रवर्ती चौधरी ने खोला मोर्चा ..

कहा कि सफाई व्यवस्था का वही काम जो पहले 80 लाख रुपये में होता था, उसे बिना किसी सुधार के 1 करोड़ 16 लाख रुपये में बदल दिया गया. इस बढ़े हुए 36 लाख रुपये के अंतर को लेकर आरोप है कि यह राशि सीधे मुख्य पार्षद के निवास तक पहुंचाई जाती है.






                               


  • वोटिंग प्रक्रिया में दबाव और पार्षदों को सदन से बाहर निकालने का आरोप
  • 80 लाख का काम 1.16 करोड़ में बदलने और परिवारवाद पर गंभीर सवाल

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : नगर परिषद एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में आ गया है. वार्ड पार्षद चक्रवर्ती चौधरी ने नगर परिषद में वित्तीय अनियमितता, टेंडर में गड़बड़ी और प्रशासनिक मनमानी को लेकर बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने दावा किया है कि सदन में न केवल पार्षदों पर दबाव बनाया गया बल्कि करोड़ों रुपये के फंड में भी भारी हेरफेर किया गया है.

चक्रवर्ती चौधरी के अनुसार नगर परिषद में कुल 42 पार्षद हैं, लेकिन मुख्य पार्षद द्वारा सदन में केवल अपने 5 प्रतिनिधियों को वोटिंग के लिए आगे रखा गया और बाकी पार्षदों को सदन से बाहर कर दिया गया. आरोप है कि विरोध करने वाले पार्षदों को धमकी दी गई कि उनके वार्डों में विकास कार्य रोक दिए जाएंगे और साथ ही प्रलोभन भी दिया गया.

टेंडर प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि सफाई व्यवस्था का वही काम जो पहले 80 लाख रुपये में होता था, उसे बिना किसी सुधार के 1 करोड़ 16 लाख रुपये में बदल दिया गया. इस बढ़े हुए 36 लाख रुपये के अंतर को लेकर आरोप है कि यह राशि सीधे मुख्य पार्षद के निवास तक पहुंचाई जाती है. इसके अलावा 300 करोड़ रुपये से अधिक की नगर परिषद निधि को कागजी निकासी दिखाकर खाली करने का भी आरोप लगाया गया है.

पार्षद का यह भी कहना है कि छठ घाट सफाई, नाला सफाई जैसे बड़े कार्य मुख्य पार्षद के परिवार और करीबियों को दिए जा रहे हैं. बड़े टेंडरों को 15-15 लाख के छोटे हिस्सों में बांटकर विभागीय योजना के नाम पर अनियमितता की जा रही है.

सदन की कार्यवाही को लेकर भी आरोप है कि प्रोसीडिंग बुक पर पहले से ही हस्ताक्षर करवा लिए जाते हैं और बाद में उसमें मनमाने एजेंडे जोड़ दिए जाते हैं, जबकि किसी पार्षद को उसकी प्रति नहीं दी जाती.

वहीं अपने ऊपर लगे सवालों का जवाब देते हुए चक्रवर्ती चौधरी ने कहा कि वे 2002 से पार्षद हैं और जनता का विश्वास उनके साथ है. उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है. साथ ही उन्होंने जिला अधिकारी से सीसीटीवी फुटेज की जांच की मांग की है ताकि सदन की सच्चाई सामने आ सके.

पूरा मामला अब प्रशासनिक जांच और राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है.

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