भगवान की भक्ति से मिलते हैं सुखद परिणाम : आचार्य पीताम्बर

कहा कि भागवत का अर्थ है भाव में रत होना. उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यक्ति जितना अधिक सच्चे भाव से भगवान की भक्ति करता है, उसे उतने ही सुखद परिणाम प्राप्त होते हैं. 






                               


25वीं सालगिरह पर मिश्रा परिवार ने कराया भव्य श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन
कलश यात्रा के साथ हुआ शुभारंभ, कथा सुनने उमड़े श्रद्धालु

बक्सर में बस स्टैंड के समीप स्थित सुविधा मेडिकल एजेंसी परिसर में श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन शुरू हुआ, जिसने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय माहौल में रंग दिया. शादी की 25वीं सालगिरह के अवसर पर आशुतोष मिश्र एवं रेणु मिश्रा द्वारा आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में पहले ही दिन से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति देखने को मिल रही है.

कथा प्रारंभ होने से पहले पारंपरिक विधि-विधान के साथ भव्य कलश यात्रा निकाली गई. इसमें महिलाओं और युवाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया. श्रद्धालु सिर पर कलश लेकर भक्ति गीतों और जयकारों के बीच यात्रा में शामिल हुए, जिससे पूरे इलाके का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया.

अंतर्राष्ट्रीय कथा प्रवक्ता श्री प्रेमाचार्य पीताम्बर जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि भागवत का अर्थ है भाव में रत होना. उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यक्ति जितना अधिक सच्चे भाव से भगवान की भक्ति करता है, उसे उतने ही सुखद परिणाम प्राप्त होते हैं. उन्होंने कहा कि ईश्वर भक्ति में लीन रहने वाला व्यक्ति जीवन में शांति, संतोष और सकारात्मक फल प्राप्त करता है.

महाराज ने भागवत कथा को अमृत के समान बताते हुए कहा कि जो व्यक्ति इसे श्रद्धा से सुनता है, वह अमृत पान के बराबर पुण्य अर्जित करता है. उनके अनुसार, कथा सुनने से भले ही शरीर अमर न हो, लेकिन आत्मा अवश्य अमरता की ओर अग्रसर होती है. उन्होंने लोगों को परोपकार की भावना अपनाने और एक-दूसरे की सहायता के लिए तत्पर रहने का संदेश दिया.

इस आयोजन में मुख्य यजमान आशुतोष कुमार मिश्रा, रेणु मिश्रा, आदित्य कुमार मिश्रा, अतुल कुमार मिश्र सहित समस्त मिश्रा परिवार उपस्थित रहा. साथ ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा का लाभ उठाने पहुंचे और पूरे आयोजन स्थल पर भक्ति का माहौल देखने को मिला.














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