वही ऐतिहासिक स्थल है जहां 26 जून 1539 को मुगल सम्राट हुमायूं और अफगान शासक शेरशाह सूरी के बीच युद्ध हुआ था, जिसमें शेरशाह सूरी विजयी हुए थे. यह महर्षि च्यवन की धरती है. जहां च्यवनप्राश का आविष्कार हुआ था.
- प्लेटफार्म पर खोदा गया गड्ढा यात्रियों के लिए बना जानलेवा, जर्जर फुटओवर ब्रिज से बढ़ी चिंता
- सफाई, पानी और ट्रेनों के ठहराव की समस्या से जूझ रहे यात्री, धीमी निर्माण गति पर उठे सवाल
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : जिले का चौसा रेलवे स्टेशन, जो ऐतिहासिक और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, आज अपनी बदहाल स्थिति और अधूरे विकास कार्यों के कारण चर्चा में है. अमृत भारत योजना के तहत शुरू किया गया निर्माण कार्य अब तक पूरा नहीं हो सका है, जबकि प्लेटफार्म पर खोदा गया बड़ा गड्ढा यात्रियों के लिए खतरा बन गया है.
पूर्व मध्य रेलवे के दानापुर मंडल के अंतर्गत आने वाला चौसा रेलवे स्टेशन हावड़ा-दिल्ली मुख्य रेल मार्ग पर स्थित है और वाराणसी से करीब 127 किलोमीटर पूर्व में पड़ता है. यह वही ऐतिहासिक स्थल है जहां 26 जून 1539 को मुगल सम्राट हुमायूं और अफगान शासक शेरशाह सूरी के बीच युद्ध हुआ था, जिसमें शेरशाह सूरी विजयी हुए थे. यह महर्षि च्यवन की धरती है. जहां च्यवनप्राश का आविष्कार हुआ था.
इतिहास के साथ-साथ यह क्षेत्र पुरातात्विक दृष्टि से भी समृद्ध रहा है. यहां गंगा घाटी क्षेत्र से जैन कालीन कांस्य मूर्तियों का संग्रह मिला था, जिनकी संख्या 18 बताई जाती है. इन मूर्तियों में कल्पवृक्ष और 16 जैन तीर्थंकरों की प्रतिमाएं शामिल हैं, जिनमें ऋषभदेव की पहचान स्पष्ट रूप से की जा सकती है. वर्तमान में ये सभी मूर्तियां पटना संग्रहालय में सुरक्षित रखी गई हैं.
1858 में स्थापित हुआ था यह रेलवे स्टेशन
साल 1858 में स्थापित यह रेलवे स्टेशन आज भी कई सवारी और मालगाड़ियों के ठहराव का प्रमुख केंद्र है. क्षेत्र के लोग इसी स्टेशन के माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों से जुड़े हुए हैं. साथ ही, थर्मल पावर प्लांट आने-जाने वाले लोगों के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण स्टेशन है.
वर्तमान में चिंताजनक है हालात
हालांकि, इतने महत्वपूर्ण स्टेशन की वर्तमान स्थिति बेहद चिंताजनक है. स्टेशन परिसर में सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है. प्लेटफार्म पर जगह-जगह बड़ी-बड़ी झाड़ियां और घास उग आई हैं, जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
अमृत भारत योजना का अधूरा काम बना जानलेवा
सबसे गंभीर समस्या अमृत भारत योजना के तहत किए जा रहे निर्माण कार्य को लेकर सामने आई है. योजना के अंतर्गत प्लेटफार्म पर बड़ा गड्ढा खोदकर छोड़ दिया गया है, जो अब तक भरा या सुरक्षित नहीं किया गया है. यह गड्ढा यात्रियों, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए बड़ा खतरा बन गया है और किसी भी समय हादसे का कारण बन सकता है.
जर्जर हालत में एकमात्र फुटओवर ब्रिज
इसके अलावा, स्टेशन पर बना एकमात्र फुट ओवर ब्रिज भी जर्जर स्थिति में है. यात्रियों की सुविधा के लिए पीने के पानी और शौचालय की समुचित व्यवस्था नहीं होने से भी लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
धरना-प्रदर्शन के साथ ही रेल अधिकारियों को सौंपा गया ज्ञापन
स्थानीय निवासी, पूर्व जिला परिषद सदस्य एवं रेल यात्री संघर्ष समिति के संयोजक डॉक्टर मनोज कुमार यादव ने बताया कि रेलवे प्रशासन इस ऐतिहासिक स्टेशन की स्थिति सुधारने के लिए गंभीर नहीं है. उन्होंने कहा कि यहां से प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग यात्रा करते हैं, लेकिन सुविधाओं की कमी लगातार बनी हुई है. चौसा से पटना जाने के लिए सुबह सात बजे के बाद कोई भी गाड़ी नहीं हैं. डॉ यादव के मुताबिक उन्होंने जन शताब्दी तथा मगध एक्सप्रेस के ठहराव के लिए धरना प्रदर्शन के साथ ही सांसद सुधाकर सिंह, रेलवे के डीआरएम तथा जीएम को भी ज्ञापन सौंपा गया है.
वहीं, स्टेशन प्रबंधक ने बताया कि निर्माण कार्य जारी होने के कारण प्लेटफार्म पर गड्ढा खोदा गया है. हालांकि उन्होंने भी स्वीकार किया कि कार्य की गति धीमी है, जिससे समस्याएं बढ़ रही हैं.
कहते हैं अधिकारी :
अमृत भारत योजना के तहत रेलवे स्टेशन का कायाकल्प होना है. निर्माण कार्य जारी है लेकिन निर्माण कार्य की गति धीमी क्यों है इसकी जानकारी ली जा रही है.
सरस्वती चंद्र
मुख्य जनसंपर्क अधिकारी,
पूर्व मध्य रेलवे, हाजीपुर






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