उन्होंने धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि जब-जब पृथ्वी पर अत्याचार और अधर्म बढ़ता है, तब-तब प्रभु विभिन्न रूपों में अवतार लेकर धर्म की स्थापना करते हैं.
- प्रेमाचार्य पीताम्बर जी महाराज बोले- श्रीकृष्ण का जीवन देता है संस्कार और धर्म का संदेश
- नंदोत्सव प्रसंग पर गूंजे जयघोष, भक्तिमय हुआ कथा पंडाल
बक्सर टॉप न्यूज, बक्सर : शहर के बस स्टैंड स्थित सुविथा मेडिकल एजेंसी परिसर में आयोजित सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का प्रसंग श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के बीच संपन्न हुआ. 25वीं वैवाहिक वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित इस धार्मिक आयोजन में कथा व्यास प्रेमाचार्य पीताम्बर जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के अवतार, उनकी लीलाओं और जीवन मूल्यों का भावपूर्ण वर्णन किया. कथा सुनते ही पूरा पंडाल “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष से गूंज उठा और श्रद्धालु भक्ति में डूब गए.
श्रीकृष्ण के जीवन से संस्कार सीखने का संदेश
कथा व्यास ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण स्वयं जानते थे कि वह परमात्मा हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने सदैव अपने माता-पिता का सम्मान किया और उनके चरणों में नमन किया. उन्होंने कहा कि आज के समाज में श्रीकृष्ण के जीवन से संस्कार, मर्यादा और समर्पण की सीख लेने की आवश्यकता है. उन्होंने धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि जब-जब पृथ्वी पर अत्याचार और अधर्म बढ़ता है, तब-तब प्रभु विभिन्न रूपों में अवतार लेकर धर्म की स्थापना करते हैं.
कंस के अत्याचार से लेकर गोकुल के आनंद तक
प्रेमाचार्य जी महाराज ने बताया कि मथुरा में कंस के अत्याचार चरम पर पहुंचने के बाद भगवान विष्णु ने देवकी के अष्टम पुत्र के रूप में श्रीकृष्ण का अवतार लिया. वहीं त्रेता युग में रावण के अत्याचारों को समाप्त करने के लिए भगवान श्रीराम का अवतार हुआ था. उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का जन्म केवल एक धार्मिक घटना नहीं, बल्कि अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है. जन्म के बाद गोकुल में मनाया गया नंदोत्सव भक्तों के जीवन में आनंद, प्रेम और उत्साह का संदेश देता है.
“माखन चोरी” के पीछे छिपा आध्यात्मिक संदेश
कथा के दौरान व्यास जी ने श्रीकृष्ण की माखन चोरी लीला का आध्यात्मिक अर्थ भी समझाया. उन्होंने कहा कि प्रभु ने गोपियों के घरों से केवल माखन चुराया, जिसका अर्थ है कि उन्होंने सार तत्व को ग्रहण किया और असार को छोड़ दिया. इसी प्रकार मनुष्य को भी संसार के नश्वर भोगों में उलझने के बजाय अपने भीतर स्थित परमात्मा को पाने का प्रयास करना चाहिए. यही जीवन का वास्तविक कल्याण है.
श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही. मुख्य यजमान आशुतोष मिश्रा, रेणु मिश्रा, आदित्य कुमार मिश्रा, अतुल कुमार मिश्रा सहित समस्त मिश्रा परिवार ने श्रद्धालुओं का स्वागत किया. कथा स्थल पर देर शाम तक भक्ति गीतों और जयघोषों से माहौल भक्तिमय बना रहा.






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