विभिन्न अध्यायों में डॉ. भारवि के व्यक्तित्व, कथा साहित्य, संपादन-कला, फुटकर रचनाओं तथा साहित्यिक विशेषताओं का विस्तार से विश्लेषण किया गया है. वहीं परिशिष्ट में कई प्रतिष्ठित साहित्यकारों के साक्षात्कारों को शामिल कर शोध को और अधिक प्रामाणिक बनाया गया है.
- वीर कुंअर सिंह विश्वविद्यालय में सम्पन्न हुई पी-एच.डी. की मौखिकी परीक्षा
- भोजपुरी कथा साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर पर शोध को मिली विद्वानों की सराहना
बक्सर टॉप न्यूज, बक्सर : भोजपुरी साहित्य जगत के लिए सोमवार का दिन ऐतिहासिक उपलब्धि लेकर आया, जब वीर कुंअर सिंह विश्वविद्यालय के भोजपुरी विभाग में शोधार्थी राजेश कुमार आदित्य की पी-एच.डी. मौखिकी परीक्षा सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई. उनका शोध विषय “डॉ. अरुण मोहन भारवि के रचना संसार” रहा, जिसे भोजपुरी साहित्य के गंभीर और मौलिक अध्ययन के रूप में देखा जा रहा है. इस उपलब्धि ने न सिर्फ शोधार्थी बल्कि भोजपुरी साहित्य के प्रख्यात हस्ताक्षर डॉ. अरुण मोहन भारवि को भी नई अकादमिक ऊंचाई प्रदान की है.
मौखिकी परीक्षा के दौरान भोजपुरी विभाग का माहौल साहित्यिक गरिमा और अकादमिक ऊर्जा से भरा नजर आया. विभागाध्यक्ष प्रो. दिवाकर पाण्डेय, शोध निर्देशिका डॉ. उषा रानी, जेपी विश्वविद्यालय छपरा के प्रो. सिद्धार्थ शंकर तथा स्वयं साहित्यकार डॉ. अरुण मोहन भारवि की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष बना दिया. कार्यक्रम में कथाकार कृष्ण कुमार, प्रो. नीरज सिंह, डॉ. कौशल्या शर्मा सहित कई शोधार्थियों की सहभागिता रही.
रांची विश्वविद्यालय के शोध परीक्षक प्रो. जंग बहादुर पांडेय ने अपने प्रतिवेदन में कहा कि यह शोध भोजपुरी कथा साहित्य के महत्वपूर्ण रचनाकार डॉ. अरुण मोहन भारवि की समग्र साहित्य-साधना पर आधारित एक गंभीर, प्रामाणिक और शोधपरक कृति है. उन्होंने माना कि शोधार्थी ने साहित्यकार के व्यक्तित्व और कृतित्व का गहन विश्लेषण करते हुए शोध को सात अध्यायों में सुव्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत किया है.
शोध के विभिन्न अध्यायों में डॉ. भारवि के व्यक्तित्व, कथा साहित्य, संपादन-कला, फुटकर रचनाओं तथा साहित्यिक विशेषताओं का विस्तार से विश्लेषण किया गया है. वहीं परिशिष्ट में कई प्रतिष्ठित साहित्यकारों के साक्षात्कारों को शामिल कर शोध को और अधिक प्रामाणिक बनाया गया है. विद्वानों का मानना है कि यह शोध भोजपुरी साहित्य में नए विमर्श को जन्म देगा और आने वाले शोधार्थियों के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ बनेगा.
इस उपलब्धि पर भोजपुरी साहित्य मंडल के महासचिव डॉ. वैरागी प्रभाष चतुर्वेदी, सचिव अमरेंद्र दूबे, प्रचार सचिव कौशल शर्मा, राष्ट्रीय मुख्य संरक्षक बालेश्वर दयाल जायसवाल, राष्ट्रीय अध्यक्ष मदनलाल प्रभातीलाल जायसवाल, राष्ट्रीय महासचिव आदित्य वर्धनम, साहित्यकार कृष्ण कुमार तथा कवि शिव बहादुर पांडेय ‘प्रीतम’ सहित कई साहित्यकारों और सामाजिक प्रतिनिधियों ने भोजपुरी विभाग को बधाई दी है.






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