ईओ के निलंबन पर पूर्व वार्ड पार्षद राकेश सिंह का दावा, कहा- शिकायत के बाद हुई कार्रवाई ..

कहा कि किला मैदान में विकास कार्यों के नाम पर हुई कथित अनियमितताओं को लेकर उन्होंने पहले ही जिलाधिकारी बक्सर तथा बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग को पत्र और ई-मेल भेजकर जांच की मांग की थी.

 




                              




  • किला मैदान मामले में डीएम और नगर विकास विभाग को भेजा था पत्र व ई-मेल
  • कहा- करोड़ों रुपये खर्च के बावजूद नहीं सुधरी व्यवस्था, संपत्ति की भी हो जांच

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : मुख्यमंत्री के हेलीकॉप्टर की लैंडिंग नहीं होने के मामले में नगर परिषद बक्सर के कार्यपालक पदाधिकारी कुमार ऋत्विक के निलंबन के बाद पूर्व वार्ड पार्षद राकेश कुमार सिंह ने दावा किया है कि उनकी शिकायत के बाद ही यह कार्रवाई हुई है. उन्होंने कहा कि किला मैदान में विकास कार्यों के नाम पर हुई कथित अनियमितताओं को लेकर उन्होंने पहले ही जिलाधिकारी बक्सर तथा बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग को पत्र और ई-मेल भेजकर जांच की मांग की थी.

राकेश सिंह ने कहा कि किला मैदान के सौंदर्यीकरण और विकास कार्यों के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन धरातल पर अपेक्षित कार्य नहीं दिख रहा है. उनका आरोप है कि लगभग 2 से 3 करोड़ रुपये की निकासी के बावजूद मैदान की स्थिति दयनीय बनी रही, जिसके कारण मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान हेलीकॉप्टर की लैंडिंग तक नहीं हो सकी.

उच्चस्तरीय जांच की मांग

पूर्व वार्ड पार्षद ने अपने पत्र में किला मैदान से संबंधित सभी विकास योजनाओं, खर्च की गई राशि और कराए गए कार्यों की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है. उनका कहना है कि यदि जांच कराई जाती है तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं.

संपत्ति जांच की भी उठाई मांग

राकेश सिंह ने कहा कि केवल निलंबन से मामला समाप्त नहीं होना चाहिए. उन्होंने मांग की कि कार्यपालक पदाधिकारी के कार्यकाल में हुए कार्यों की विस्तृत जांच कराई जाए तथा उनकी संपत्ति की भी जांच की जाए. उन्होंने आरोप लगाया कि यदि वित्तीय अनियमितता या पद के दुरुपयोग के तथ्य सामने आते हैं तो संबंधित अधिकारियों, ठेकेदारों और जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए.

हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि किसी जांच एजेंसी द्वारा नहीं की गई है. नगर विकास एवं आवास विभाग ने अपने निलंबन आदेश में मुख्यमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था में कथित चूक, पदीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही और वरीय अधिकारियों के आदेशों के उल्लंघन को कार्रवाई का आधार बताया है.













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