15 साल पुराने जानलेवा हमले के मामले में आया फैसला, अधिवक्ता पर हमला करने वाले दो दोषियों को 8-8 साल की सजा ..

अहिरौली निवासी अधिवक्ता प्रदुमन चौबे उस दिन न्यायालय गए थे. इसी दौरान उनके घर से फोन कर सूचना दी गई कि उनके गोतिया उनकी हत्या की साजिश रच रहे हैं. इसके बाद उन्होंने इस आशंका की जानकारी अधिवक्ता संघ को भी दी.




                              


  • कोर्ट ने हत्या के प्रयास समेत विभिन्न धाराओं में सुनाई सजा, 50-50 हजार रुपये का लगाया अर्थदंड
  • 2011 में घर लौटते समय अधिवक्ता को घेरकर लाठी, भाला, रामी और कट्टा से किया गया था हमला

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : करीब 15 वर्ष पुराने अधिवक्ता पर जानलेवा हमले के मामले में गुरुवार को अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया. जिला अपर सत्र न्यायाधीश-2 की अदालत ने औद्योगिक थाना कांड संख्या 21/12 में आरोपित विरेन्द्र कुमार चौबे और हरेन्द्र कुमार चौबे को दोषी करार देते हुए हत्या के प्रयास सहित विभिन्न धाराओं में सजा सुनाई. दोनों दोषियों को धारा 307 के तहत 8-8 वर्ष के सश्रम कारावास तथा 50-50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा दी गई. जुर्माना नहीं देने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा.

अदालत ने धारा 324 के तहत दोनों आरोपितों को दो-दो वर्ष के सश्रम कारावास और 10-10 हजार रुपये अर्थदंड तथा धारा 323 के तहत छह-छह माह के कारावास की भी सजा सुनाई. अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी.

15 वर्ष बाद आया फैसले का दिन

अपर लोक अभियोजक बिनोद कुमार सिंह ने बताया कि यह मामला 6 जून 2011 का है. अहिरौली निवासी अधिवक्ता प्रदुमन चौबे उस दिन न्यायालय गए थे. इसी दौरान उनके घर से फोन कर सूचना दी गई कि उनके गोतिया उनकी हत्या की साजिश रच रहे हैं. इसके बाद उन्होंने इस आशंका की जानकारी अधिवक्ता संघ को भी दी.

घर लौटते समय किया गया था हमला

कोर्ट से घर लौटते समय सारीमपुर बगीचा के समीप पहले से घात लगाए आरोपितों ने उन्हें घेर लिया. आरोप है कि लाठी, भाला, रामी और कट्टा से उन पर हमला कर गंभीर रूप से जख्मी कर दिया गया. शोर सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे तो हमलावर फरार हो गए. इसके बाद घायल अधिवक्ता को सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका फर्द बयान पुलिस ने दर्ज किया.

साक्ष्यों के आधार पर दोषी ठहराए गए आरोपित

सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों की गवाही और अनुसंधान को महत्वपूर्ण मानते हुए दोनों आरोपितों को दोषी पाया. सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने उन्हें दोषसिद्ध कर सजा सुनाई.













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