टीबी को चौसा परियोजना में 'नो एंट्री', 152 अधिकारियों व श्रमिकों की जांच में सब निकले स्वस्थ ..

परियोजना के 152 अधिकारियों एवं श्रमिकों की अत्याधुनिक अल्ट्रा-पोर्टेबल हैंड-हेल्ड एक्स-रे मशीन से जांच की गई. राहत की बात यह रही कि स्क्रीनिंग के दौरान किसी भी अधिकारी अथवा श्रमिक में क्षय रोग (टीबी) का कोई संदिग्ध मामला सामने नहीं आया. 





                              


  • प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत दो दिवसीय स्क्रीनिंग शिविर का हुआ आयोजन

  • अल्ट्रा-पोर्टेबल हैंड-हेल्ड एक्स-रे मशीन से हुई जांच, एक भी संदिग्ध मरीज नहीं मिला

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान को गति देने के उद्देश्य से चौसा स्थित एसजेवीएन ताप विद्युत परियोजना परिसर में दो दिवसीय विशेष टीबी जांच एवं स्क्रीनिंग स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया. एक से दो जुलाई तक चले इस अभियान में परियोजना के 152 अधिकारियों एवं श्रमिकों की अत्याधुनिक अल्ट्रा-पोर्टेबल हैंड-हेल्ड एक्स-रे मशीन से जांच की गई. राहत की बात यह रही कि स्क्रीनिंग के दौरान किसी भी अधिकारी अथवा श्रमिक में क्षय रोग (टीबी) का कोई संदिग्ध मामला सामने नहीं आया. इसे परियोजना परिसर में कार्यरत कर्मियों की बेहतर स्वास्थ्य स्थिति और जागरूकता का सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.

आधुनिक तकनीक से हुई स्वास्थ्य जांच

राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के तहत आयोजित इस शिविर का संचालन जिला यक्ष्मा केंद्र, बक्सर की ओर से किया गया. शिविर में चेस्ट एक्स-रे (पीए व्यू) के माध्यम से सभी अधिकारियों एवं श्रमिकों की स्क्रीनिंग की गई. आधुनिक पोर्टेबल एक्स-रे मशीन के उपयोग से कम समय में प्रभावी और सटीक जांच संभव हो सकी.

चिकित्सकों के समन्वय से सफल हुआ आयोजन

शिविर के सफल संचालन में संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. शालिग्राम पाण्डेय तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, चौसा के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. विमल कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही. उनके संयुक्त नेतृत्व, मार्गदर्शन और स्वास्थ्य विभाग की टीम के समन्वित प्रयासों से पूरा शिविर सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ.

स्वास्थ्य और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

एसजेवीएन ताप विद्युत परियोजना प्रबंधन ने कहा कि अधिकारियों एवं श्रमिकों का स्वास्थ्य, सुरक्षा और कल्याण संस्थान की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है. इसी प्रतिबद्धता के तहत जिला स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से भविष्य में भी समय-समय पर स्वास्थ्य जांच एवं जन-जागरूकता शिविर आयोजित किए जाएंगे, ताकि कार्यस्थल पर स्वस्थ, सुरक्षित और उत्पादक वातावरण बनाए रखा जा सके.

टीबी मुक्त भारत अभियान को मिलेगा बल

स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि नियमित स्क्रीनिंग और समय पर जांच से टीबी जैसी संक्रामक बीमारी की रोकथाम और शीघ्र पहचान संभव होती है. ऐसे अभियान न केवल कर्मचारियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं, बल्कि प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के लक्ष्य को हासिल करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.












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