पिता से बढ़कर कोई सच्चा साथी नहीं - ई. अरुण

वक्ताओं ने शिक्षकों की समाज में भूमिका पर विचार व्यक्त किए. डॉ. सं चतुर्वेदी ने कहा कि शिक्षक समाज की रीढ़ होते हैं, लेकिन यह रीढ़ धीरे-धीरे कमजोर हो रही है, जो चिंता का विषय है. उन्होंने कहा कि शिक्षा को सशक्त करने के लिए समाज को शिक्षकों का सम्मान करना होगा.


 












                                           


  • अतिथियों को पौधा और महिलाओं को साड़ी-शॉल से किया गया सम्मानित
  • बक्सर में दिव्य भारत ट्रस्ट ने श्रद्धांजलि सभा का किया आयोजन

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : दिव्य भारत ट्रस्ट के जिला कार्यालय में सोमवार को स्वर्गीय श्री रामनाथ ओझा की प्रथम पुण्यतिथि श्रद्धा और आदर के साथ मनाई गई. इस अवसर पर विभिन्न गणमान्य व्यक्तियों ने उनकी स्मृतियों को नमन किया और उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया. कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ शिक्षाविद् एवं सेवानिवृत्त शिक्षक श्री भगवान पांडेय ने की, जबकि संचालन इंजीनियर अरुण कुमार ओझा ने किया. कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसमें उपस्थित अतिथियों को पौधे भेंटकर तथा महिलाओं को साड़ी व शॉल प्रदान कर सम्मानित किया गया.

शिक्षकों की भूमिका पर हुई चर्चा

इस श्रद्धांजलि सभा के दौरान विभिन्न वक्ताओं ने शिक्षकों की समाज में भूमिका पर विचार व्यक्त किए. डॉ. सं चतुर्वेदी ने कहा कि शिक्षक समाज की रीढ़ होते हैं, लेकिन यह रीढ़ धीरे-धीरे कमजोर हो रही है, जो चिंता का विषय है. उन्होंने कहा कि शिक्षा को सशक्त करने के लिए समाज को शिक्षकों का सम्मान करना होगा.

डॉ. एस.एन. सिंह ने कहा कि स्वर्गीय रामनाथ ओझा जैसे शिक्षक समाज की अमूल्य धरोहर होते हैं, जिनके आदर्शों को सभी शिक्षकों को अपनाना चाहिए. दंत चिकित्सक डॉ. ए.के. सिंह ने कहा कि शिक्षक समाज-निर्माता होते हैं और यदि उन्हें उचित सम्मान मिले, तो वे एक आदर्श समाज की नींव रख सकते हैं. वहीं, डॉ. हिंगमनी ने स्वर्गीय रामनाथ ओझा के सुपुत्र इंजीनियर अरुण कुमार ओझा की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनमें उनके दिवंगत पिता की निस्वार्थ सेवा-भावना स्पष्ट दिखती है, जो समाज के लिए गर्व की बात है.

महिलाओं की शिक्षा के लिए नई पहल

इस अवसर पर महिला अधिकार इकाई की सदस्यों ने घोषणा की कि जल्द ही बक्सर के दूरदराज़ गांवों में शिक्षा को सशक्त बनाने के लिए छोटे-छोटे ट्यूशन केंद्र स्थापित किए जाएंगे. इससे गरीब व जरूरतमंद बच्चों को निशुल्क शिक्षा मिल सकेगी. उन्होंने कहा कि शिक्षा ही एकमात्र ऐसा माध्यम है, जिससे समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है.

इंजीनियर अरुण कुमार ओझा ने अपने संबोधन में कहा, "पिता से बढ़कर कोई सच्चा साथी नहीं होता. उनके आदर्शों पर चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी." उन्होंने कहा कि उनके पिता ने हमेशा निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा की और शिक्षा को प्राथमिकता दी. उन्होंने यह भी संकल्प लिया कि दिव्य भारत ट्रस्ट आगे भी शिक्षा और समाजसेवा के कार्यों में सक्रिय रहेगा.

अतिथियों का सम्मान और धन्यवाद ज्ञापन

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न गणमान्य व्यक्तियों को सम्मानित किया गया. महिलाओं को साड़ी और शॉल भेंटकर उनके योगदान को सराहा गया. इसके साथ ही उपस्थित अतिथियों को पौधे देकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया.

स्वर्गीय रामनाथ ओझा के बड़े पुत्र विंध्याचल ओझा ने धन्यवाद ज्ञापन देते हुए सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि यह आयोजन उनके पिता की स्मृतियों को जीवंत रखने के लिए किया गया है और भविष्य में भी इसी तरह के आयोजन होते रहेंगे.

इस अवसर पर रविता सिंह, रितु सिंह, सुमन दुबे, विवाह पांडे, काजल तिवारी, माधुरी देवी, किरण देवी, नीतू कुमारी, अनन्या कुमारी, पूजा कुमारी, खुशबू कुमारी, शोभा दुबे सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे.











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