वर्ष 1980 में जन्मीं झांब ने एलएलएम की उपाधि प्राप्त करने के बाद वर्ष 2018 में बिहार उच्चतर न्यायिक सेवा में प्रवेश किया. वे अविवाहित हैं और अपनी प्रशासनिक दक्षता, अनुशासन और संवेदनशील न्यायिक दृष्टिकोण के लिए पहचानी जाती हैं.
- 25 साल बाद बक्सर को फिर मिली महिला पीडीजे
- पटना हाईकोर्ट ने जारी किया आदेश, हर्षित सिंह का हुआ स्थानांतरण
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : पटना उच्च न्यायालय ने बक्सर जिले को नई प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में काजल झांब की नियुक्ति का आदेश जारी कर दिया है. उनकी नियुक्ति के साथ बक्सर न्यायमण्डल में लगभग 25 वर्षों बाद फिर से किसी महिला अधिकारी को यह महत्वपूर्ण दायित्व मिला है. वर्ष 2000 में रेखा कुमारी बक्सर की प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश थीं, जो बाद में पटना उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति बनीं और वहीं से सेवानिवृत्त हुईं.
सुश्री काजल झांब वर्तमान में पटना उच्च न्यायालय में निबंधक प्रशासन के पद पर कार्यरत थीं. वर्ष 1980 में जन्मीं झांब ने एलएलएम की उपाधि प्राप्त करने के बाद वर्ष 2018 में बिहार उच्चतर न्यायिक सेवा में प्रवेश किया. वे अविवाहित हैं और अपनी प्रशासनिक दक्षता, अनुशासन और संवेदनशील न्यायिक दृष्टिकोण के लिए पहचानी जाती हैं.
इधर, बक्सर के वर्तमान प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश हर्षित सिंह का तबादला वैशाली न्यायमण्डल में कर दिया गया है. उनके स्थान पर काजल झांब की तैनाती को बक्सर के न्यायिक तंत्र के लिए नई ऊर्जा और नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है.
हाल ही में जिले में युवा जिला पदाधिकारी सुश्री साहिला की तैनाती के बाद अब न्यायपालिका में भी एक महिला अधिकारी को शीर्ष जिम्मेदारी मिलने से बक्सर में महिला नेतृत्व और अधिक मजबूत हुआ है. यह न केवल प्रशासनिक और न्यायिक ढांचे में सकारात्मक परिवर्तन का संकेत है, बल्कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में जिले के बढ़ते कदमों को भी दर्शाता है.
काजल झांब के कार्यभार संभालने के बाद न्यायिक कार्यों में पारदर्शिता, समयबद्ध फैसलों और जनहित के मामलों को प्राथमिकता मिलने की उम्मीद जताई जा रही है. बक्सर में उनकी नियुक्ति से न्यायिक व्यवस्था में एक नए दौर की शुरुआत होने की संभावना है.





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