कहा गया कि डीएम साहब के एक रिश्तेदार सर्किट हाउस में रुके हैं और सही ‘सेवा शुल्क’ के बाद फाइलों को हरी झंडी दिला रहे हैं. इस खबर ने कई शस्त्र प्रेमियों के कदम सीधे वहीं मोड़ दिए.  





                                         



  • सुबह से शाम तक मौर्य साहब की खोज—कभी शाखा, कभी सर्किट हाउस, तो कभी ‘जुगाड़ केंद्र’
  • सूत्रों के अनुसार दो दर्जन से ज्यादा लाइसेंस बांटे गए... लाइसेंस प्रेमियों ने पूरा दिन किया ‘ऑपरेशन हस्ताक्षर’

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : जिलाधिकारी के तबादले की सुगबुगाहट फैलते ही कलेक्ट्रेट में शस्त्र लाइसेंस चाहने वालों की भीड़ ऐसी उमड़ी मानो कोई विशेष छूट योजना लागू हो गई हो. आए दिन हर्ष फायरिंग की घटनाएं होती हैं. हाल ही में रोहतास में हर्ष फायरिंग में जिले के एक शिक्षक की मौत भी हुई थी. इसके बावजूद हथियार रखने का ‘शौक’ लोगों पर इस तरह हावी हुआ कि सुबह से शाम तक लोग मौर्य साहब को खोजते रहे. न शाखा में मिले, न आवास में, तो कई सीधे सर्किट हाउस तक पहुंच गए.

कलेक्ट्रेट की शस्त्र शाखा, जो आम दिनों में शांत रहती है, अचानक ‘मेला-ठेला ज़ोन’ में बदल गई. एक लिपिक, एक डाटा ऑपरेटर और दर्जनों लाइसेंसधारी hopeful—सबका लक्ष्य सिर्फ एक था: डीएम साहब के आखिरी हस्ताक्षर. सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, इस अफरा-तफरी के बीच लगभग दो दर्जन से ज्यादा हथियारों के लाइसेंस बांटे भी गए.

फाइल अपडेट कराने वालों की बेचैनी इस कदर थी कि कई लोग खुलेआम यह भी कहते सुने गए—“बस बता दीजिए पैसा कहाँ देना है... पर गारंटी के साथ. काम नहीं हुआ तो रिफंड चाहिए.” इसी बीच एक अफवाह बाजार में तेजी से फैली कि डीएम साहब के एक रिश्तेदार सर्किट हाउस में हैं और वही फाइलों को ‘हरी झंडी दिलाने’ में मदद कर रहे हैं. इसके बाद सर्किट हाउस का माहौल भी किसी ‘क्लीरेंस काउंटर’ जैसा नजर आने लगा.

इधर सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप शरण का कहना है कि न्यायालय ने इस संदर्भ में पहले ही स्पष्ट निर्देश दिए हैं. पटना उच्च न्यायालय ने 18 जुलाई 2022 को एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा था कि यदि किसी व्यक्ति पर जीवन या संपत्ति से संबंधित खतरे की रिपोर्ट नहीं है, तो केवल इस आधार पर उसके हथियार के लाइसेंस को अस्वीकार नहीं किया जा सकता. यह फैसला माननीय न्यायमूर्ति मोहित कुमार शाह ने Civil Writ Jurisdiction Case No. 3152 of 2019 में सुनाया था.

प्रदीप शरण ने यह भी सवाल उठाया कि पता नहीं क्यों विगत दिनों में यह परिपाटी बन गई है कि डीएम अपने कार्यकाल के अंत में ही अचानक से लाइसेंस बांटना शुरू कर देते हैं. यह जांच का विषय है कि आनन-फानन में जो लाइसेंस बांटे गए, उनके आवेदन कब से लंबित थे और पहले किन कारणों से उन्हें रोक कर रखा गया था?

उधर सूत्रों के मुताबिक जाते-जाते डीएम डॉ. विद्यानंद सिंह कितने और लाइसेंस स्वीकृत करेंगे, यह भी पूरे दिन चर्चा में रहा. श्रीराम की शिक्षा स्थली और महर्षि विश्वामित्र की तपोभूमि कही जाने वाली इस धरती पर लाइसेंस वितरण की यह अनोखी आपाधापी निश्चित रूप से सवाल खड़े करती है.