उनके शोध में भक्तिकालीन साहित्य की संवेदनात्मक शक्ति और सांस्कृतिक आधार को नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया, जिसने उपस्थित विद्वानों को प्रभावित किया.
![]() |
| सम्मान प्राप्त करते डॉ मिश्र |
-
- महाकवि सूरदास के बाल लीला वर्णन पर शोध-पत्र को मिला अंतरराष्ट्रीय मंच पर सम्मान
- नगपुरा के शिक्षाविद ने बढ़ाया जिले का गौरव
बक्सर टॉप न्यूज, बक्सर : जिले के शिक्षाविद डॉ अरूण कुमार मिश्र को “रविंद्र नाथ टैगोर अकादमिक पुरस्कार-2026” से सम्मानित किया गया है. यह सम्मान उन्हें स्वामी सहजानंद कॉलेज, जहानाबाद में 19 से 21 फरवरी तक आयोजित तीन दिवसीय मल्टी-डिसिप्लिनरी इंटरनेशनल सेमिनार के दौरान प्रदान किया गया. सेमिनार में प्रस्तुत उनके शोध-पत्र “महाकवि सूरदास के बाललीला वर्णन का वैशिष्ट्य” को विद्वानों ने अत्यंत सराहा, जिसके आधार पर उन्हें यह प्रतिष्ठित अकादमिक पुरस्कार दिया गया.
डॉ अरूण कुमार मिश्र बक्सर जिले के सिमरी प्रखंड स्थित नगपुरा गांव निवासी स्व. डॉ कैलाश प्रसाद मिश्र के पुत्र हैं. उन्होंने जिला मुख्यालय स्थित पीसी कॉलेज से स्नातक की डिग्री प्राप्त की. इसके पश्चात उन्होंने वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा से हिंदी विषय में स्नातकोत्तर तथा पीएचडी की उपाधि हासिल की. वर्तमान में वे किशोरी सिन्हा कॉलेज, औरंगाबाद में प्राध्यापक के पद पर कार्यरत हैं.
सेमिनार में डॉ मिश्र ने महाकवि सूरदास के बाललीला वर्णन की साहित्यिक विशेषताओं, भाव-सौंदर्य और काव्यगत गहराई पर विस्तार से प्रकाश डाला. उनके शोध में भक्तिकालीन साहित्य की संवेदनात्मक शक्ति और सांस्कृतिक आधार को नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया, जिसने उपस्थित विद्वानों को प्रभावित किया.
सम्मान प्राप्ति के बाद डॉ मिश्र ने कहा कि आज के युवाओं का झुकाव हिंदी की अपेक्षा अंग्रेजी की ओर अधिक है, जबकि हिंदी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पहचान मिल चुकी है. उन्होंने कहा कि इस भाषा में अपार संभावनाएं हैं तथा भारतीय संस्कृति और सभ्यता के मूल तत्वों को समझने के लिए हिंदी का ज्ञान अत्यंत आवश्यक है.
डॉ अरूण कुमार मिश्र की इस उपलब्धि से न केवल उनका परिवार और संस्थान, बल्कि पूरा बक्सर जिला गौरवान्वित है. शिक्षा जगत में उनकी यह उपलब्धि युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है.




.png)


.png)
.gif)







0 Comments