खबर का असर : तटबंध के पास खनन पर प्रशासन का कड़ा प्रहार, 29,700 घन फीट योजना खारिज ..

स्थल के जियो-कोऑर्डिनेट्स संकलित कर अंचल अधिकारी, सिमरी को भूमि स्वामित्व की पहचान के लिए भेजा गया है, ताकि संबंधित भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके.






                                         


  • नई नियमावली जारी कर दी चेतावनी, अवैध गतिविधि पर होगी सख्त कार्रवाई
  • उल्लंघन पर लाखों रुपये जुर्माना और पट्टा रद्द करने तक की चेतावनी

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर-कोइलवर तटबंध के समीप प्रस्तावित 29,700 घन फीट मिट्टी खनन योजना को जिला प्रशासन ने अवैध गतिविधियों की आशंका के बीच खारिज कर दिया है. मामले को गंभीर मानते हुए प्रशासन ने न केवल जांच तेज कर दी है, बल्कि पूरे जिले में साधारण मिट्टी खनन के लिए कड़ी नियमावली जारी कर स्पष्ट संदेश दिया है कि अब बिना अनुमोदन और नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माना, पट्टा निलंबन और रद्दीकरण जैसी सख्त कार्रवाई तय है.

बक्सर टॉप न्यूज़ में प्रकाशित समाचार के बाद जिला प्रशासन ने तत्काल संज्ञान लेते हुए जांच शुरू की. जिला खनन पदाधिकारी से प्राप्त सूचना के अनुसार खनन निरीक्षक द्वारा स्थल का निरीक्षण कर प्रतिवेदन समर्पित किया गया है. स्थल के जियो-कोऑर्डिनेट्स संकलित कर अंचल अधिकारी, सिमरी को भूमि स्वामित्व की पहचान के लिए भेजा गया है, ताकि संबंधित भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके.

मामले की गंभीरता को देखते हुए बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, बक्सर के कार्यपालक अभियंता से भी तटबंध के कटाव निरोधी एवं निर्माण कार्यों में लगे संवेदकों की सूची मांगी गई है. प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि कहीं किसी अधिकृत कार्य की आड़ में अवैध खनन तो नहीं हो रहा है.

विस्तृत नियमावली जारी

खनिज विकास पदाधिकारी, जिला खनन कार्यालय, बक्सर द्वारा जारी नई नियमावली में खनन की अधिकतम गहराई 1.5 मीटर निर्धारित की गई है. स्पष्ट किया गया है कि खनन कार्य ग्राउंड वाटर लेवल से कम से कम 1.5 मीटर ऊपर तक सीमित रहेगा. उत्खनन के दौरान विस्फोटक के प्रयोग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा तथा सामान्य जल निकासी के पैटर्न में किसी भी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया जाएगा.

नियमों के तहत उत्खनित गड्ढों की समुचित घेराबंदी अनिवार्य होगी और बाद में उन्हें उपयोगी प्रयोजनों के लिए पुनर्स्थापित करना होगा. खनन क्षेत्र राष्ट्रीय पार्क या वन्यप्राणी अभ्यारण्य की सीमा से एक किलोमीटर के भीतर नहीं होगा तथा किसी असैनिक संरचना से कम से कम 15 मीटर की दूरी बनाए रखना अनिवार्य है. मानसून अवधि में खनन कार्य पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा.

निकाले गए टॉपसॉयल को सुरक्षित रखकर बाद में उसी क्षेत्र में फैलाना होगा, ताकि पर्यावरणीय संतुलन बना रहे. मजदूरों के लिए पेयजल और स्वच्छता की समुचित व्यवस्था करना भी अनिवार्य किया गया है.

उल्लंघन पर भारी जुर्माना

जिला खनन कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि नियमों की अवहेलना पर कड़ी आर्थिक दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी. बिना ढंके या गीला बालू परिवहन करने पर ट्रैक्टर से 5 हजार और बड़े वाहनों पर 25 हजार रुपये का दंड निर्धारित है. जीपीएस से छेड़छाड़ या अवैध परिवहन की स्थिति में 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.

अवैध खनन, परिवहन और भंडारण पर खान एवं खनिज अधिनियम की धारा-21 के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी.

प्रशासन का स्पष्ट संदेश

जिला प्रशासन ने दो टूक शब्दों में कहा है कि केवल अनुमोदित खनन योजना और अग्रिम रॉयल्टी शुल्क जमा करने के बाद ही निर्धारित नियमों के अनुरूप खनन की अनुमति दी जाएगी. इसके अतिरिक्त किसी भी प्रकार की अनधिकृत गतिविधि पूर्णतः अवैध मानी जाएगी.

प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि बक्सर-कोइलवर तटबंध क्षेत्र में अवैध खनन को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. जांच में दोषी पाए जाने पर विधिसम्मत कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.

अंत में जनसामान्य से अपील की गई है कि वे अपुष्ट अथवा भ्रामक सूचनाओं पर ध्यान न दें तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल प्रशासन को दें, ताकि तटबंध, पर्यावरण और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.








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