सीआरपीएफ की वर्दी से समाज सेवा तक : रंजन कुमार राय बने मानवता की मिसाल ..

पिता के हृदयाघात से निधन के बाद उन्होंने सीआरपीएफ की नौकरी छोड़ दी. इसके बाद उन्होंने सड़क निर्माण कार्य से जुड़ते हुए भारतमाला प्रोजेक्ट में काम शुरू किया. यहीं से उनके जीवन ने एक नई दिशा पकड़ी, जहां कमाई से ज्यादा अहमियत समाज सेवा को मिली.






                                         



  • बक्सर के सपूत ने अपनी कमाई का 60 प्रतिशत जनसेवा में लगाया
  • निःशुल्क एंबुलेंस, इलाज, शिक्षा और रक्तदान में निभा रहे सामाजिक जिम्मेदारी

बक्सर टॉप न्यूज, बक्सर : राजपुर थाना क्षेत्र के ग्राम पो डिहरी निवासी रंजन कुमार राय की कहानी सेवा, संवेदना और संकल्प की मिसाल बन चुकी है. 10 मार्च 2011 को उन्होंने सीआरपीएफ में नौकरी ज्वाइन की थी. उनके बड़े भाई राजीव कुमार राय ने भी साथ ही सीआरपीएफ की सेवा शुरू की और करीब आठ वर्षों तक श्रीनगर में तैनात रहे.

अक्टूबर 2022 में रंजन कुमार राय ने एक बड़ा और भावनात्मक फैसला लिया. पिता के हृदयाघात से निधन के बाद उन्होंने सीआरपीएफ की नौकरी छोड़ दी. इसके बाद उन्होंने सड़क निर्माण कार्य से जुड़ते हुए भारतमाला प्रोजेक्ट में काम शुरू किया. यहीं से उनके जीवन ने एक नई दिशा पकड़ी, जहां कमाई से ज्यादा अहमियत समाज सेवा को मिली.

आज रंजन कुमार राय अपनी आय का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा समाज सेवा में खर्च कर रहे हैं. उन्होंने “बक्सर वॉरियर्स” नामक संगठन की स्थापना की, जिसके माध्यम से वे लगातार सामाजिक कार्य कर रहे हैं. सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को समय पर एंबुलेंस न मिलने की समस्या को उन्होंने बेहद करीब से देखा है कई बार चार घायलों के लिए एक एंबुलेंस भी नाकाफी साबित होती थी, मजबूरी में लोगों को ऑटो या अन्य साधनों का सहारा लेना पड़ता है. ऐसे में उनका कहना हैं कि लोग अगर उनके नंबर 9973990111 पर फोन करें तो वह एम्बुलेंस उपलब्ध करा सकते हैं

लोगों की पीड़ा देख स्वयं खरीद ली एंबुलेंस 

इसी पीड़ा से प्रेरित होकर रंजन कुमार राय ने निःशुल्क एंबुलेंस सेवा शुरू की. उन्होंने करीब 60 लाख रुपये की टोयोटा हाईलेक्स खरीदी और उसे सर्वसुविधा संपन्न एंबुलेंस में परिवर्तित कराया. इस एंबुलेंस में एक साथ चार घायलों को ले जाने की सुविधा है. इसके साथ ही वे रक्तदान, इलाज और जरूरतमंदों की आर्थिक मदद में भी लगातार सहयोग कर रहे हैं.

वॉरियर्स करियर अकादमी की स्थापना करने की है तैयारी 

इतना ही नहीं, समाज के भविष्य यानी बच्चों की शिक्षा को लेकर भी वे उतने ही गंभीर हैं. उन्होंने “वॉरियर्स कैरियर अकादमी” की स्थापना करने की तैयारी की है, जहां बच्चों को विशेषज्ञ शिक्षकों के माध्यम से विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाएगी. खास बात यह है कि यह पूरी व्यवस्था निःशुल्क होगी, ताकि आर्थिक कमजोरी किसी भी बच्चे के सपनों में बाधा न बने.

उनके इन्हीं सराहनीय और निस्वार्थ कार्यों को देखते हुए 5 जनवरी को पटना में उन्हें बिहार गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया. रंजन कुमार राय अक्सर प्रसिद्ध शायर साबित रोहतासवी का शेर गुनगुनाते हैं—

“जो अपनी फिक्र में गुजरे वो जिंदगी क्या है,
किसी के काम ना आए वो आदमी क्या है?”

वाकई, रंजन कुमार राय की जिंदगी इस शेर की जीवंत मिसाल बन चुकी है.








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