कहा कि गंगा केवल नदी नहीं, बल्कि जनजीवन और संस्कृति से जुड़ी धरोहर है, जिसके संरक्षण के लिए प्रशासन और समाज दोनों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है.

- विश्व आर्द्र भूमि दिवस पर प्रकृति की गोद में हुई जिला गंगा समिति की अनोखी बैठक
- छह महीनों के लिए स्वच्छता, सौंदर्यकरण और गंगा संरक्षण को लेकर अधिकारियों को मिले स्पष्ट निर्देश
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : विश्व आर्द्र भूमि दिवस के अवसर पर ब्रह्मपुर प्रखंड के उधूरा ग्राम स्थित गोकुल जलाशय के तट पर जिला गंगा समिति की बैठक आयोजित की गई. जिला पदाधिकारी-सह-अध्यक्ष जिला गंगा समिति श्रीमती साहिला की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में गंगा और उससे जुड़े जलाशयों के संरक्षण, स्वच्छता, सौंदर्यकरण और विकास को लेकर अगले छह महीनों की व्यापक कार्ययोजना बनाने पर सहमति बनी और संबंधित पदाधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए गए.
बैठक के दौरान जिला पदाधिकारी ने कहा कि गंगा केवल नदी नहीं, बल्कि जनजीवन और संस्कृति से जुड़ी धरोहर है, जिसके संरक्षण के लिए प्रशासन और समाज दोनों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है. इसी उद्देश्य से बैठक का आयोजन जलाशय के तट पर किया गया, ताकि योजनाएं कागज से निकलकर धरातल पर प्रभावी रूप से लागू हों.
उन्होंने बक्सर-भरौली गंगा ब्रिज पर प्रस्तावित तीन लेन निर्माण से संबंधित अनापत्ति प्रमाण पत्र के मुद्दे पर चर्चा करते हुए आवश्यक प्रक्रियाओं को शीघ्र पूरा करने का निर्देश दिया. साथ ही स्वच्छता जागरूकता कार्यक्रमों को आगामी विशेष दिवसों से जोड़कर व्यापक स्तर पर आयोजित करने पर जोर दिया गया.
जिला पदाधिकारी ने स्वयं सहायता समूह, एनसीसी, माई भारत, हिंदुस्तान स्काउट गाइड और एनएसएस की सहभागिता सुनिश्चित करने की बात कही. उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को अगले छह महीनों के लिए स्वच्छता से जुड़ी विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया, जिससे अभियान निरंतर और प्रभावी बना रहे.
बैठक में मोक्ष धाम और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट योजना की प्रगति की समीक्षा की गई. गंगा तटों के सौंदर्यकरण, सघन वृक्षारोपण, गंगा महाआरती, गंगा योग, गंगा ग्रामों में विशेष स्वच्छता एवं विकास कार्य तथा गोकुल जलाशय के समग्र विकास को लेकर भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए.
नगर निकाय क्षेत्रों में साफ-सफाई और स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने पर बल देते हुए जिला पदाधिकारी ने कहा कि गंगा और जलाशयों का संरक्षण भविष्य की पीढ़ियों के लिए अनिवार्य है. गोकुल जलाशय के तट पर आयोजित यह बैठक प्रशासनिक निर्णयों के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी संदेश भी बनकर सामने आई.



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