प्रिया-प्रियतम मिलन महोत्सव : श्रीमद्‌भागवत कथा ने छुए भक्तों के हृदय ..

कहा कि मानव जीवन इसीलिए मिला है कि हम भगवान की कृपामय भक्ति का अनुभव कर सकें. ब्रह्म जिज्ञासा पर प्रकाश डालते हुए आचार्य ने कहा कि सृष्टि का जन्म, पालन और विनाश उसी ब्रह्म से होता है.






                                         




  • आचार्य रत्नेश जी महाराज ने भक्ति, विद्या और परम धर्म के गूढ़ संदेश दिए
  • कथा का द्वितीय दिवस; भक्तों ने अनुभव किया भगवान की कृपा का रस

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : नया बाजार आश्रम में पूज्य मामाजी महाराज की 18वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित प्रिया-प्रियतम मिलन महोत्सव का आज द्वितीय दिवस था, जिसमें श्रीमद्‌भागवत कथा ने उपस्थित भक्तों के हृदयों को भावविभोर कर दिया. कथा आचार्य रत्नेश जी महाराज के द्वारा सुनाई गई, जिसमें उन्होंने जीवन, भक्ति और परम धर्म के गूढ़ संदेश साझा किए.

आचार्य रत्नेश जी ने बताया कि रामराज्य में शिवजी ने रामजी से वर मांगा कि उनके चरणों में भक्ति प्रदान करें. उन्होंने कहा कि मानव जीवन इसीलिए मिला है कि हम भगवान की कृपामय भक्ति का अनुभव कर सकें. ब्रह्म जिज्ञासा पर प्रकाश डालते हुए आचार्य ने कहा कि सृष्टि का जन्म, पालन और विनाश उसी ब्रह्म से होता है.

कथा में उन्होंने यह भी बताया कि बिना कारण के कोई कार्य नहीं होता और जो कार्य परमात्मा की प्राप्ति हेतु हो, वही परम धर्म है. भगवान केवल अपने भक्तों के लिए अवतरित होते हैं और प्रत्येक अवतार का उद्देश्य जीवों की भलाई और धर्म की रक्षा करना है. उन्होंने भगवान के 24 अवतारों का वर्णन भी किया.

विद्या के महत्व पर जोर देते हुए आचार्य रत्नेश जी ने कहा कि सच्ची विद्या वही है जो जीव को मुक्ति दिलाए. संस्कार और संस्कृति की सुरक्षा की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि माता धन्य है, जिसके गर्भ में शिशु की रक्षा हेतु श्रीकृष्ण का अवतार हुआ और गर्भस्थ शिशु परीक्षित की रक्षा की गई.

आचार्य ने कहा, “जिसकी निष्ठा सच्ची होती है, वही भगवान की बात समझता है और मानता है.”

कथा के दौरान आश्रम के महंत राजाराम शरण दास जी महाराज, प्रसिद्ध राम कथा वाचक राम नाथ ओझा और अन्य परिकर सहित बड़ी संख्या में भक्त मौजूद रहे. उपस्थित श्रद्धालुओं ने भगवान के प्रति अपनी भक्ति और श्रद्धा का अनुभव किया.








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