पति को किडनी देकर दी नई जिंदगी, उसी की मौत के बाद खुद भी तोड़ा जीवन से नाता ..

परिजनों ने बताया कि सुल्तानपुर स्टेशन के आगे ट्रेन के बढ़ते ही नीतू ने अचानक ट्रेन से छलांग लगा दी. अंधेरी रात में किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला. ट्रेन से गिरते ही उनका शव क्षत-विक्षत हो गया और मौके पर ही उनकी मौत हो गई.






                                         



- खेती से नौकरी तक का तय किया सफर, बीमारी ने छीन ली खुशियां
- तीन मासूमों के सिर से उठ गया माता-पिता का साया, खखड़ही गांव में छाया मातम 

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : यह कहानी सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि प्रेम, त्याग और असहनीय पीड़ा की ऐसी दास्तान है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया. इटाढ़ी थाना क्षेत्र के खखड़ही गांव निवासी मुरलीधर उपाध्याय के पुत्र अजीत कुमार उपाध्याय उर्फ बबलू और उनकी पत्नी नीतू उपाध्याय की मौत ने तीन मासूम बच्चों को एक ही झटके में अनाथ कर दिया.

इस बाबत मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार अजीत उपाध्याय पहले गांव में रहकर खेतीबाड़ी किया करते थे. बाद में उनकी नौकरी चौसा स्थित पावर प्लांट में लग गई. नौकरी शुरु होने के कुछ ही समय बाद उनकी तबीयत खराब रहने लगी. परिजनों ने कई जगह इलाज कराया, तब पता चला कि उनकी किडनी खराब हो चुकी है. इसके बाद वे गांव में रहकर ही इलाज कराने लगे.

बिना किसी संकोच के पति को दान दी किडनी 

हालत ज्यादा बिगड़ने पर अजीत को लखनऊ स्थित पीजीआई अस्पताल ले जाया गया. वहां डॉक्टरों ने किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह दी. उस कठिन दौर में पत्नी नीतू उपाध्याय पति के लिए ढाल बनकर खड़ी रहीं. उन्होंने बिना किसी संकोच के अपनी एक किडनी दान कर दी. ऑपरेशन सफल रहा और परिवार को लगा कि अब जिंदगी फिर से पटरी पर लौट आएगी. नीतू की कुर्बानी रंग लाई थी और अजीत की हालत में सुधार भी हुआ.

अजीत की मौत के बाद गुमसुम हो गई थी नीतू

लेकिन यह राहत ज्यादा दिनों तक नहीं टिक सकी. कुछ समय बाद अजीत की तबीयत फिर बिगड़ने लगी. इलाज के लिए उन्हें दोबारा पीजीआई लखनऊ ले जाया गया, जहां शुक्रवार को इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया. पति की मौत की खबर ने नीतू को भीतर से तोड़ दिया. परिजनों के अनुसार अजीत के निधन के बाद नीतू पूरी तरह गुमसुम हो गई थीं. सभी को लगा कि यह सदमे की स्थिति है और समय के साथ वह संभल जाएंगी.

सुल्तानपुर के समीप लगाई ट्रेन से छलांग 

अजीत का शव एंबुलेंस से खखड़ही गांव लाया गया. वहीं नीतू उपाध्याय अन्य परिजनों के साथ गांव लौटने के लिए ट्रेन से रवाना हुईं. लेकिन यह सफर अंतिम साबित हुआ. परिजनों ने बताया कि सुल्तानपुर स्टेशन के आगे ट्रेन के बढ़ते ही नीतू ने अचानक ट्रेन से छलांग लगा दी. अंधेरी रात में किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला. ट्रेन से गिरते ही उनका शव क्षत-विक्षत हो गया और मौके पर ही उनकी मौत हो गई.

एक झटके में अनाथ हो गए तीन बच्चे 

एक ओर परिवार अजीत की मौत के गम से उबर भी नहीं पाया था, दूसरी ओर नीतू की इस घटना ने सबको पूरी तरह तोड़ दिया. दम्पत्ति अपने पीछे 14 वर्षीय पुत्री शनाया, 11 वर्षीय अनाया और सात वर्षीय पुत्र सर्वजीत को छोड़ गए हैं. गांव में हर घर गमगीन है और हर आंख नम. लोग यही कह रहे हैं कि नीतू ने जो त्याग किया, वह मिसाल था, लेकिन पति के बिना जीने की ताकत शायद वह अपने भीतर नहीं जुटा सकीं. यह त्रासदी खखड़ही गांव के लिए लंबे समय तक न भरने वाला घाव बन गई है.







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