भजन-कीर्तन पर झूमते भक्तों ने भगवान के प्रति अपनी अटूट आस्था प्रकट की. युवाओं ने भी पूरे उत्साह के साथ भगवान के नाम का जयघोष कर वातावरण को भक्तिरस से सराबोर कर दिया.
- श्रीमद् भागवत कथा के प्रथम दिवस भव्य जलभरी शोभायात्रा
- सत्संग के महत्व पर आचार्य रणधीर ओझा का प्रवचन
बक्सर टॉप न्यूज, बक्सर : सदर प्रखंड के गोसाईंपुर ग्राम में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के प्रथम दिन भव्य जलभरी शोभायात्रा के साथ आध्यात्मिक माहौल की शुरुआत हुई. बैंड-बाजे की मधुर धुनों और भगवान के जयघोष के बीच निकली इस शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और पूरा गांव भक्तिमय हो उठा.
शोभायात्रा की शुरुआत महिलाओं द्वारा सिर पर कलश धारण कर की गई. पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं की कतारें आस्था और श्रद्धा का अनुपम दृश्य प्रस्तुत कर रही थीं. भजन-कीर्तन पर झूमते भक्तों ने भगवान के प्रति अपनी अटूट आस्था प्रकट की. युवाओं ने भी पूरे उत्साह के साथ भगवान के नाम का जयघोष कर वातावरण को भक्तिरस से सराबोर कर दिया.
श्रीमद् भागवत कथा के प्रथम दिवस मामाजी के कृपापात्र आचार्य श्री रणधीर ओझा ने अपने प्रवचन में भागवत पुराण के मूल उद्देश्य पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि “भगवान का साक्षात स्वरूप” है. इसका श्रवण करना स्वयं भगवान से मिलने का माध्यम है. उन्होंने बताया कि भागवत जीव को ईश्वर से जोड़कर उसके जीवन में दिव्यता का संचार करता है.
आचार्य श्री ने सत्संग के महत्व को विस्तार से समझाते हुए कहा कि ‘सत्संग’ का अर्थ है ‘सत्’ यानी सत्य, परमात्मा या सद्गुणों के साथ संग. यह केवल साधु-संतों के पास बैठना नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म से भगवान की ओर उन्मुख होना ही सच्चा सत्संग है. उन्होंने कहा कि जैसे गंदे वस्त्र जल से धुलकर निर्मल हो जाते हैं, वैसे ही मन के विकार सत्संग के अमृत से शुद्ध हो जाते हैं. सत्संग से व्यक्ति के संस्कारों में परिवर्तन आता है और उसका झुकाव संसार से हटकर भक्ति, सेवा और अध्यात्म की ओर होने लगता है.
उन्होंने यह भी कहा कि सत्संग व्यक्ति के आचार, विचार और जीवन दृष्टि को बदलने का शक्तिशाली माध्यम है. यदि सत्संग को जीवन में उतारा जाए तो मानसिक शांति, सकारात्मक सोच और सामाजिक परिवर्तन संभव है.
आयोजक बबन उपाध्याय ने बताया कि यह कथा 19 फरवरी से 25 फरवरी 2025 तक प्रतिदिन अपराह्न 3:30 बजे से संध्या 7:00 बजे तक आयोजित की जाएगी.




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